

धनबाद में स्वास्थ्य व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। झरिया के जामाडोवा निवासी गुड्डू सिंह उर्फ संजीत सिंह की इलाज के दौरान असर्फी अस्पताल में हुई मृत्यु के बाद उत्पन्न विवाद ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। आरोप है कि मामूली बकाया राशि के कारण अस्पताल प्रबंधन ने पार्थिव शरीर देने से इंकार कर दिया, जो मानवीय मूल्यों के विपरीत है।

इस गंभीर प्रकरण को झरिया की विधायक रागिनी सिंह ने विधानसभा में प्रमुखता से उठाया और निष्पक्ष जांच के साथ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनके हस्तक्षेप के बाद आज धनबाद सिविल सर्जन कार्यालय में जांच बैठक आयोजित की गई, जिसमें सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा और उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, हजारीबाग के डॉ. विजय शंकर मौजूद रहे। बैठक में पीड़ित परिवार के साथ विधायक भी उपस्थित रहीं और पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा की गई।
इस दौरान विधायक रागिनी सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“हमारी लड़ाई किसी एक अस्पताल से नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था से है जहाँ मरीज और उनके परिजनों के साथ अमानवीय व्यवहार होता है। भुक्तभोगी परिवार को न्याय मिलना चाहिए और ऐसी घटना दोबारा कभी न हो, यही हमारी प्रमुख मांग है।”
उन्होंने आगे कहा कि पीड़ितों और शोषितों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी यह लड़ाई आगे भी पूरी मजबूती और प्रतिबद्धता के साथ जारी रहेगी।
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