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हजारीबाग की घटना के विरोध में झरिया के पत्रकारों ने फूँका स्वास्थ्य मंत्री का पुतला, सुरक्षा कानून लागू करने की उठी मांग

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Apr 30, 2026
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झरिया : हजारीबाग में झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के समर्थकों द्वारा खबर संकलन कर रहे पत्रकार के साथ की गई बर्बरतापूर्ण मारपीट की घटना के बाद पूरे प्रदेश के पत्रकारों में भारी उबाल देखा जा रहा है। पत्रकारों के साथ हुई इस बदसलूकी और हिंसा के विरोध में बुधवार की शाम झरिया प्रेस क्लब के बैनर तले पत्रकारों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। इस दौरान पत्रकारों ने रोष प्रकट करते हुए स्वास्थ्य मंत्री का पुतला दहन किया और सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत झरिया प्रेस क्लब से एक पदयात्रा के रूप में हुई। यह आक्रोश मार्च शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों जैसे धर्मशाला रोड और मेन रोड से होते हुए देशबंधु सिनेमा घर के समीप पहुँचा। यहाँ प्रदर्शनकारी पत्रकारों ने सरकार और मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना विरोध जताते हुए स्वास्थ्य मंत्री का पुतला फूँका।
इस मौके पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे झरिया प्रेस क्लब के सचिव शैलेन्द्र जायसवाल ने घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि हजारीबाग की घटना केवल एक व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचलने का एक सोची-समझी साजिश और प्रयास है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार के रसूखदार मंत्री और उनके समर्थक अपनी कमियों को छिपाने के लिए हिंसा का सहारा लेंगे और पत्रकारों की आवाज दबाने की कोशिश करेंगे, तो आम जनता की फरियाद सुनने वाला कोई नहीं बचेगा। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि अपनी जान जोखिम में डालकर समाज को सच दिखाने वाले पत्रकारों को झारखंड में सम्मान मिलने के बजाय मारपीट का सामना करना पड़ रहा है।
प्रेस क्लब के सचिव ने सरकार की कार्यप्रणाली और उदासीनता पर भी तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्रकार लंबे समय से अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। पत्रकारों ने इस दौरान सरकार से मुख्य रूप से तीन मांगें दोहराईं। पहली मांग पत्रकार सुरक्षा कानून को अविलंब लागू करने की है ताकि फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों पर होने वाले हमलों को रोका जा सके। दूसरी मांग पत्रकार बीमा योजना की है, जिससे कार्यक्षेत्र के जोखिमों के बीच उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके। तीसरी मांग पत्रकार आवासीय योजना को लेकर है, ताकि प्रदेश के पत्रकारों के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें।
झरिया के पत्रकारों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि हजारीबाग मामले के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई और पत्रकारों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हुए, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और भी उग्र रूप लेगा। पत्रकारों का कहना है कि वे अब और “कोपभाजन” का शिकार नहीं बनेंगे और अपने हक व सम्मान के लिए कलम के साथ-साथ सड़क पर उतरकर भी लड़ाई जारी रखेंगे।
इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से योगेश सोनी, अंकित झा, बनन झा, सनी शर्मा, जॉन मिर्ज़ा, गुड्डू वर्मा, मनोज शर्मा, अभिमन्यु कुमार, राजेश वर्मा, एहसान जख्मी, विकास साव, सुमित अरोड़ा, अखिलेश मिश्रा सहित क्षेत्र के अन्य कई पत्रकार उपस्थित थे।


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