

सरायकेला – 26 अप्रैल 2026: रविवार को सरस्वती शिशु मंदिर उच्च विद्यालय, सरायकेला में आज दिनांक 26 अप्रैल 2026 को नए अभिभावकों की एक विस्तृत एवं ज्ञानवर्धक बैठक का सफल आयोजन किया गया। बैठक का शुभारंभ विधिवत् वंदना के साथ किया गया, जिससे पूरे कार्यक्रम में सकारात्मक एवं सांस्कृतिक वातावरण का संचार हुआ। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नव-प्रवेशित विद्यार्थियों के अभिभावकों को विद्यालय की शिक्षण पद्धति, सांस्कृतिक वातावरण, अनुशासन व्यवस्था तथा समग्र विकास की अवधारणा से अवगत कराना था।

कार्यक्रम का संचालन विद्यालय की आशा दीदी द्वारा अत्यंत प्रभावशाली एवं सुव्यवस्थित ढंग से किया गया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अभिभावकों को बैठक के उद्देश्य, आवश्यकता एवं उपयोगिता के विषय में विस्तार से जानकारी दी।
इस अवसर पर विद्यालय के उपप्रधानाचार्य तुषार कांत पति ने विद्या भारती के शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रणाली को विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने बताया कि विद्या भारती के अंतर्गत शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास पर समान रूप से बल दिया जाता है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे विद्यालय के साथ सतत संवाद बनाए रखें ताकि बच्चों के विकास में सामूहिक सहयोग सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की आरती दीदी ने शिशु वाटिका (प्रारंभिक शिक्षा) की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए उसके बारह आयामों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन आयामों के माध्यम से बालकों के व्यक्तित्व का संतुलित एवं प्राकृतिक विकास किया जाता है, जिसमें खेल, गीत, संस्कार, भाषा, शारीरिक क्रियाएं एवं सृजनात्मक गतिविधियां सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्वर्णप्राशन के महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, स्मरण शक्ति एवं समग्र स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने में सहायक होता है।
विद्यालय के कोषाध्यक्ष प्रसाद महतो ने भी अभिभावकों को संबोधित करते हुए विद्यालय की व्यवस्थाओं, सहयोगात्मक वातावरण एवं पारदर्शिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इसके पश्चात् विद्यालय के सबसे वरिष्ठ आचार्य रंजन आचार्य ने अभिभावकों के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने विद्यालय की गौरवशाली परंपरा, संस्कारमूलक शिक्षा एवं वर्षों से चली आ रही शिक्षण पद्धति के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जिससे अभिभावक अत्यंत प्रभावित हुए।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन रोज़ दीदी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सभी उपस्थित अभिभावकों एवं शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समापन सौरव आचार्य द्वारा वंदे मातरम् के सामूहिक गान के साथ हुआ, जिससे पूरे वातावरण में देशभक्ति एवं उत्साह का संचार हुआ।
बैठक के दौरान अभिभावकों को विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों, अनुशासन प्रणाली, सह-शैक्षिक कार्यक्रमों एवं संस्कारमूलक शिक्षा की विशेषताओं से भी अवगत कराया गया। साथ ही, अभिभावकों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें विद्यालय की कार्यप्रणाली के प्रति संतुष्ट किया गया।
अंततः, यह बैठक अत्यंत सफल, उपयोगी एवं प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुई। अभिभावकों ने विद्यालय के इस प्रयास की सराहना करते हुए भविष्य में भी इस प्रकार की मार्गदर्शी बैठकों के आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।
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