
सरायकेला – सरायकेला स्थित ‘इंस्टीट्यूट फॉर एजुकेशन’ में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ हुआ। इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘जीएसटी सुधारों का ग्रामीण व शहरी आजीविका और रोजगार पर प्रभाव’ रखा गया है।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि जमशेदपुर के सेंट्रल जीएसटी कमिश्नर बीके गुप्ता, विशिष्ट अतिथि सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष मानव केडिया, सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी और मुख्य वक्ता सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड के प्रोफेसर डॉ. केबी सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर अतिथियों ने सम्मेलन की स्मारिका (Souvenir) का विमोचन भी किया।
जीएसटी 2.0: आम आदमी की बढ़ी क्रय शक्ति
सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने जीएसटी के सकारात्मक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
दवा और पाठ्य सामग्री जैसी आवश्यक वस्तुओं को टैक्स फ्री किया गया है।
ट्रैक्टर पर जीएसटी घटाकर 5% करने से गांवों में मशीनीकरण बढ़ा है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
कर की अधिकतम सीमा को 40% से घटाकर 28% पर लाना और दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर छूट देना, आम जनता की क्रय शक्ति बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुआ है।
“जीएसटी ने देश के विकास को ‘डबल डोज’ दी है। इससे न केवल लॉजिस्टिक लागत कम हुई है, बल्कि उद्योगों को राज्यों के वैट (VAT) झंझटों से भी मुक्ति मिली है।” – डॉ. केबी सिंह, मुख्य वक्ता

नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि जीएसटी का मुख्य लक्ष्य MSME और छोटे व्यवसायों को सुविधा देना था। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि जब तक पंचायत स्तर पर जागरूकता नहीं पहुंचेगी, तब तक इसके सुधारों का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि:
पंचायत स्तर पर नियमित कार्यशालाएं और प्रशिक्षण आयोजित किए जाएं।
टैक्स स्लैब व्यवस्था को और सरल बनाकर तीन प्रमुख स्लैब में एकीकृत किया जाए ताकि अनुपालन (compliance) आसान हो सके।
कॉन्फ्रेंस के प्रथम दिन तीन महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
प्रथम जीएसटी और ग्रामीण आर्थिक परिवर्तन प्रो. जेबी कोमरै बिहार और झारखंड सहित देश भर के 13 प्रतिभागियों ने शोध पत्र पढ़े।
द्वितीय जीएसटी और शहरी रोजगार गतिशीलता डॉ. देबाशीष प्रधान (XLRI) 5 प्रतिभागियों ने पेपर प्रस्तुत किए। डॉ. चंद्रशेखर जोशी और डॉ. तुलिका महान्ती बतौर रिसोर्स पर्सन शामिल हुए।
तृतीय डिजिटल बुनियादी ढांचा और क्षमता निर्माण डॉ. शुक्ला महान्ती
पूर्व, कॉलेज के डायरेक्टर आरएन महान्ती ने अतिथियों का स्वागत किया। सम्मेलन की कन्वेनर और विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) शुक्ला महान्ती ने विषय वस्तु पर प्रकाश डालते हुए इसे शोध और अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर बताया। प्रथम दिन का समापन नीति संबंधी सुझावों और व्यापक विचार-विमर्श के साथ सफलतापूर्वक हुआ।

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