

सरायकेला: कभी घोर नक्सल प्रभावित माने जाने वाले टेंगाडीह गाँव में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। नीमडीह थाना क्षेत्र के दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की तराई में बसे आदिवासी बहुल टेंगाडीह पंचायत के उत्क्रमित विद्यालय टेंगाडीह के लगभग 11 आदिवासी बच्चे 2 मार्च 2026 को हुई आठवीं बोर्ड परीक्षा से वंचित रह गए।

ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि प्रधान शिक्षक सरजीत कुमार की लापरवाही के कारण बच्चों का नाम पोर्टल पर नामांकन के समय दर्ज नहीं किया गया। “जिस समय पोर्टल में नाम भरना था, उस समय शिक्षक चुप रहे। परीक्षा के दिन उनकी नींद खुली,” एक अभिभावक ने कहा।
आदिवासी ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा विभाग की अनदेखी से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। सवाल उठ रहा है कि शिक्षक की सैलरी रोकने से क्या बच्चों को दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलेगा? अब तक राज्य सरकार या विभाग की ओर से संबंधित शिक्षक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
इस स्कूल में तीन सरकारी शिक्षक पदस्थापित हैं। इसके बावजूद इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, यह बड़ा सवाल है। अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी से जवाब मांग रहे हैं। उनका आरोप है कि कार्रवाई न होना मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने 2 मार्च को आयोजित होने वाली परीक्षा में शामिल होने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य किया था. लेकिन विद्यालय के शिक्षकों ने समय पर पंजीकरण के लिए आवेदन जमा नहीं किया. छात्रों का प्रवेश पत्र जारी नहीं हो सका जिससे ये छात्र परीक्षा से वंचित जो छात्र परीक्षा नहीं दे पाये उनके नाम हैं- चित्रा सिंह, उत्तम सिंह, प्रतिमा सिंह, उर्मिला दास, जीतवाहन सिंह, चंपारानी सिंह, प्रियंका मुर्मू, वन बिहारी सिंह, सुशील हांसदा, शुभम मांझी और मनोज सिंह. परीक्षा से वंचित होने के कारण छात्रों एवं उनके अभिभावकों में गहरा आक्रोश है. ग्रामीणों ने दोषी शिक्षकों पर कार्रवाई और बच्चों को परीक्षा का दोबारा अवसर देने की माँग की है।
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