

सरायकेला – 13 अप्रैल, 2026

सरायकेला की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान, चैत्र पर्व के अवसर पर आज नगर पंचायत अध्यक्ष श्री मनोज कुमार चौधरी के आवास पर भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। यहाँ प्राचीन घटपाट परंपरा और चड़क पूजा के अंतर्गत ‘भोकता’ (व्रती) गोरिया भार घट लेकर पहुंचे, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में सराबोर हो गया।
इस पावन अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष श्री मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि हमारी यह प्राचीन घटपाट परंपरा और चड़क पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है। उन्होंने इसे भैरव साधना के माध्यम से आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का एक सशक्त मार्ग बताया। श्री चौधरी ने जोर देकर कहा कि यह परंपरा श्रद्धा, तप और कड़े अनुशासन का एक अद्भुत उदाहरण है, जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सदियों से जीवंत बनाए हुए है।
अनुष्ठान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि:
यह अनुष्ठान तेरह दिनों तक चलता है।
इसमें तेरह भोकताओं द्वारा पूर्ण समर्पण, शुद्धता और पवित्रता के साथ नियमों का पालन किया जाता है।
झर-झर झंडा इस पावन अनुष्ठान का मुख्य प्रतीक है।
विधि-विधान से पूजन कर क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और अच्छी वर्षा की मंगल कामना की गई।
सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण
श्री चौधरी ने बताया कि कल भोकताओं का पुनः आगमन निर्धारित है, जिसके लिए प्रशासन और स्थानीय स्तर पर सभी आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने अंत में कहा कि सरायकेला का चैत्र पर्व, छऊ नृत्य और इन दिव्य अनुष्ठानों के समन्वय से एक अद्वितीय सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करता है। यह हमारी समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम है।
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