
सरायकेला। सरायकेला की सांस्कृतिक विरासत और विश्व प्रसिद्ध छऊ नृत्य की जड़ो को जीवंत रखते हुए आज दिनांक 29 मार्च 2026 को राजेन्द्र अखाड़ा द्वारा पारंपरिक श्रद्धा के साथ माँ झुमकेश्वरी की पूजा-अर्चना की गई। अखाड़ा के वर्तमान गुरु श्री नीरज कुमार पट्टनायक ने अपने परिवार और पुराने छऊ कलाकारों के साथ मिलकर माता का आशीर्वाद लिया।

परंपरा का गौरवशाली इतिहास

उल्लेखनीय है कि यह पूजा राजेन्द्र आखाड़ा के प्रथम गुरु श्री राजेन्द्र पट्टनायक द्वारा शुरू की गई थी। उनके पश्चात उनके सुपुत्र और राजकीय छऊ नृत्य कला केन्द्र के प्रथम निर्देशक स्व० नटशेखर वनविहारी पट्टनायक ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। पीढी-दर-पीढ़ी चली आ रही इस विरासत को उनके पुत्रों—स्व० गुरु अशवनी कान्त पट्टनायक एवं स्व० राधा कान्त पट्टनायक—ने सहेज कर रखा। वर्तमान में नीरज कुमार पट्टनायक इस समृद्ध परंपरा का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ कर रहे हैं।
पूजा के अवसर पर गुरु नीरज पट्टनायक ने छऊ नृत्य के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सरायकेला में पूर्व में 8 प्रमुख अखाड़े थे, जिनमें राजेन्द्र अखाड़ा और नुआगढ़ अखाड़ा मुख्य थे। आज दिखने वाला अधिकांश छऊ नृत्य इन्हीं दो अखाड़ों की देन है।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि:
“स्व० नटशेखर वनविहारी पट्टनायक जी ने आरती, शबर, धिवर, हरपार्वती, और मधु कैटभ जैसे 50 से अधिक नृत्यों का सृजन किया। दुःखद है कि उनके बाद कोई नया सृजन नहीं हुआ, बल्कि पुराने नृत्यों में ही काट-छाँट की जा रही है। इसके बावजूद, उनके परिवार को वह उचित मान-सम्मान नहीं मिल पा रहा है जिसके वे हकदार हैं।”
छऊ महोत्सव की सफलता की कामना करते हुए कहा कि
आगामी चैत्र पर्व के मद्देनजर आयोजित इस पूजा में शामिल प्रवीण पटनायक, शशांक पटनायक,रजत पटनायक ,सुभेंदु दास ,तपन पटनायक, रितु ,छोटू, अनु और जाबलु सहित परिवार के सदस्य उपस्थित रहे सभी ने सामूहिक रूप से मां झुमकेशवरी से प्रार्थना की की इस वर्ष का छऊ महोत्सव निविध्न संपन्न हो प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा हो और सभी कलाकार सुरक्षित रहे।
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