
गौ ब्राह्मण संतसेवी समाजसेवी श्री शंभू बाबू अग्रवाल जी, सधर्मपत्नी पुजा अग्रवाल जी भागवत जी से आशीर्वाद प्राप्त कर उन्होंने कथा का भावपूर्वक श्रवण किया।

इंद्र का अभिमान तोड़ने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने समस्त ब्रजवासियों से कहा कि वे इंद्र की पूजा के स्थान पर गिरिराज पर्वत की पूजा करें। जब इंद्र ने देखा कि उसकी पूजा बंद हो गई है, तो उसने क्रोधित होकर मूसलधार वर्षा भेजी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर संपूर्ण गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सात दिन तक समस्त ब्रजवासियों को सुरक्षित रखा। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने इंद्र का घमंड चूर कर दिया और संसार को यह संदेश दिया कि ईश्वर के सामने किसी भी प्रकार का अभिमान टिक नहीं सकता।

मनुष्य को सुख की प्राप्ति होती है तो कहता है कि यह मेरी महनत का फल है और वहीं जब दुःख जीवन में प्रवेश करता है तो कहते हैं कि यह सब भगवान की गलती है। मनुष्य को सब कुछ भगवान पर छोड़ देना चाहिए क्योंकि मानव को उसके कर्मों का ही फल मिलता है। मनुष्य जब सच्चे भाव से भगवान की पूजा करते हैं तो भगवान को वह मजबूरन स्वीकार करनी पड़ती है।
भगवान को किसी भी प्रकार का अभिमान प्रिय नहीं है – न बल का, न धन का, न तन का, न ज्ञान का, और न ही पद का। भक्ति का मार्ग नम्रता और विनम्रता से भरा हुआ है। भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता। जो सच्चा भक्त होता है, वह सदा अपने को दीन और तुच्छ मानता है और प्रभु के चरणों में समर्पित रहता है। विनम्रता, सेवा भाव और कृतज्ञता को अपनाकर ही हम भक्ति के मार्ग पर स्थिर रह सकते हैं।
हर सनातनी को गाय का पालन करना चाहिए। हर दिन गाय को अपने हाथों से भोजन कराना चाहिए, क्योंकि गाय का सीधा संबंध हमारे धर्म, संस्कृति और पुण्य से जुड़ा है। जिस देश में गौ हत्या होती है, वहां धर्म की स्थापना नहीं हो सकती। गौ माता हमारे धर्म और संस्कृति की आत्मा हैं। वे केवल एक पशु नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के पोषण का आधार हैं। वे हमारे वेदों, पुराणों, शास्त्रों और उपनिषदों में पूज्य मानी गई हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने भी उनका सदा पालन किया और स्वयं को गोपाल कहा।
भागवत कथा सबसे बड़ा विश्वविद्यालय और औषधालय हैं,इसमें भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और कर्म सभी का समन्वय मिलता है। भागवत से बड़ा ज्ञान संसार में कहीं नहीं है, क्योंकि यह मनुष्य को आत्मा की गहराइयों से जोड़ता है और उसे भगवान से मिलाने का माध्यम बनता है।
आप धर्म की रक्षा करो धर्म आप की रक्षा करेगा। धर्म के प्रति निष्ठा ही कल्याण का मार्ग है। यदि धर्म में आस्था और निष्ठा नहीं होगी, तो हमारा कल्याण संभव नहीं हो सकता। धर्म के बिना व्यक्ति का जीवन दिशाहीन हो जाता है। न तो उसे आंतरिक शांति मिलती है और न ही स्थायी सुख। धर्म के प्रति आस्था और निष्ठा ही सच्चे कल्याण का मार्ग है।।इस कथा को सफल बनाने में विमल चन्द्र पद्दा दे ,पिंकु सिंह रिंकी देवी, प्रदीप बंसल कांता बंसल, राहुल अग्रवाल , मोहन बंसल, राजेंद्र बंसल,सुनिल रविदास, प्रदीप साव, भोला अग्रहरि,समीर कुमार दे,जगन्नाथ दे पुष्पा देवी, अशोक कुमार दे ललीता देवी,अरूण चन्द्र दे पुतुल देवी मोहन बंसल, संतोष कुमार, गौरी शंकर झा,आदि समस्त गोविंदपुर वासियों के सहयोग से किया जा रहा है।
15/03/2026 रविवार को सुदामा कृष्ण मिलन शुकदेव जी विदाई और फुलों की होली धूमधाम से मनाया जाएगा
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