
कथा के मधुर शब्दों में प्रभु श्री कृष्ण का जन्मोत्सव बड़े हर्ष और श्रद्धा के साथ मनाया गया। जन्मदिवस के रंग और भक्ति के सुरों ने मिलकर वातावरण को दिव्य आनंद से भर दिया।

इसके साथ ही कृष्ण जन्मोत्सव की रंगीन धूम ने पूरे आयोजन को और भी उल्लासपूर्ण बना दिया। भक्तों ने प्रभु की भक्ति में रंगों का प्रयोग करते हुए प्रेम और आनंद का अद्भुत संगम अनुभव किया। हर कोना, हर चेहरा और हर मन प्रभु श्री कृष्ण के नाम और उनके रंगों से जगमगाता दिखाई दिया

आज का समय मोह-माया, लालच और दिखावे में हमें उलझा देता है। हम बाहर की दुनिया में इतना खो जाते हैं कि भीतर बसे भगवान को भूलने लगते हैं। सच तो यह है कि यदि हम माया से थोड़ा दूर रहकर, मन को शांत कर, भगवान की भक्ति में ध्यान लगाएं, तो वही कलयुग भी हमारे लिए साधना का श्रेष्ठ अवसर बन सकता है।
जब हम किसी को आगे बढ़ते या सुखी देखते हैं, तो ईर्ष्या करने से हमारे मन में अशांति पैदा होती है। लेकिन यदि हम उसी क्षण यह संकल्प लें कि हमें भी मेहनत और सद्कर्म से आगे बढ़ना है, तो वही भावना हमें सफलता की ओर ले जाती है। जहाँ तक हो सके, दूसरों को सुख देने का प्रयास करें, क्योंकि जो दूसरों के जीवन में खुशी बाँटता है, भगवान उसके जीवन को भी खुशियों से भर देते हैं।
सनातन केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक शाश्वत पद्धति है — जो हमें सत्य, करुणा, सेवा और धैर्य का मार्ग दिखाती है। सनातन को जानना मतलब उसके मूल सिद्धांतों, शास्त्रों और परंपराओं को समझना। सनातन को पहचानना मतलब उसके मूल्यों को अपने आचरण में उतारना। और सनातन का सम्मान करना मतलब हर जीव में ईश्वर को देखना।वृन्दावन में पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में होली महोत्सव एवं श्रीमद्भागवत कथा का चतुर्थ दिवस आज हमारे बच्चे संस्कारों से दूर होते रहे हैं, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, झगड़ा और माता-पिता की अवज्ञा कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण हमारे बच्चों की धर्म और शास्त्रों से दूरी है ।जब बच्चों को सही-गलत का ज्ञान नहीं मिलेगा, जब उन्हें कर्तव्य, सम्मान और संयम नहीं सिखाया जाएगा, तो वे डिजिटल दुनिया से ही सीखेंगे। घर में अगर प्रेम, संवाद और संस्कार होंगे तो बच्चे भी वैसा ही बनेंगे। इसलिए बच्चों को केवल आधुनिक शिक्षा ही नहींबल्कि मूल्य और चरित्र की शिक्षा भी दें क्योंकि मजबूत समाज की नींव संस्कारी पीढ़ी है।
मनुष्य को अपने जीवन में तीन कार्य अवश्य करने चाहिए। सबसे पहला कार्य यह है कि हर दिन गाय को अपने हाथों से भोजन कराना चाहिए, क्योंकि गाय का सीधा संबंध हमारे धर्म, संस्कृति और पुण्य से जुड़ा है। दूसरा कार्य यह है कि कुत्ते को रोजाना एक रोटी अवश्य देनी चाहिए, क्योंकि वह भगवान भैरव का रूप माना जाता है और उसकी सेवा करने से जीवन में निडरता और सुरक्षा बनी रहती है। तीसरा कार्य है पक्षियों को दाना डालना और पानी पिलाना, क्योंकि पक्षियों की सेवा करने वाला व्यक्ति कभी दरिद्र नहीं होता, उसके जीवन में हमेशा समृद्धि, सुख और शांति बनी रहती है।
द्वार पर आए किसी भी व्यक्ति को कभी भूखा नहीं लौटाना चाहिए। चाहे वह अतिथि हो, साधु हो, जरूरतमंद हो या कोई अनजान व्यक्ति—उसे यथाशक्ति भोजन या कम से कम जल अवश्य देना चाहिए। जब हम अपने द्वार से किसी को तृप्त करके भेजते हैं, तो वह केवल उसका पेट ही नहीं भरता, बल्कि हमारे घर में भी शुभता, संतोष और पुण्य की भावना लाता है।इस कथा को सफल बनाने में विमल चन्द्र पद्दा दे ,संजय अग्रवाल अनिता अग्रवाल, प्रदीप बंसल कांता बंसल,पिकु सिंह रिंकी सिंह, जगन्नाथ दे पुष्पा देवी, अशोक कुमार दे ललीता देवी, अरूण चन्द्र दे पुतुल देवी आदि समस्त गोविंदपुर वासियों के सहयोग से किया जा रहा है।
13/03/2026 दिन गुरुवार को गोवर्धन पूजा छप्पन भोग धूमधाम से मनाया जाएगा
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