
सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले के तिरुलडीह और ईचागढ़ थाना क्षेत्रों में इन दिनों बालू माफियाओं का ‘तिलिस्मी खेल’ जोरों पर है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि रात होते ही सड़कों पर अवैध बालू लदे हाइवा और ट्रैक्टरों की कतार लग जाती है, जिससे न केवल सरकारी राजस्व को लाखों की चपत लग रही है, बल्कि ग्रामीणों का जीना भी दूभर हो गया है।

रात का ‘काला’ कारोबार:

ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह परिवहन वैध है, तो आखिर इसे रात के अंधेरे में ही क्यों अंजाम दिया जा रहा है? तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही से गांव की सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। कई बार वाहन पलटने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिससे जान-माल की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है।
पुराना विवाद और प्रशासनिक चुप्पी:
विदित हो कि इसी मुद्दे को लेकर 18 नवंबर 2025 को डुमटांड़ में भारी बवाल हुआ था, जिसमें झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा के नेता तरुण महतो और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई थी। आज भी तरुण महतो जेल की सलाखों के पीछे हैं, लेकिन बालू का अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुखिया सुधीर सिंह मुंडा द्वारा डीजीपी और एसपी को पत्र सौंपने के बावजूद धरातल पर कोई ठोस असर नहीं दिख रहा है।
सिंडिकेट और रूट:
सूत्रों के अनुसार, अवैध बालू का यह खेल तिरुलडीह और ईचागढ़ से शुरू होकर नीमडीह के सिरूम होते हुए पश्चिम बंगाल और एनएच-18 के रास्ते पूर्वी सिंहभूम तक फैला हुआ है। चर्चा है कि थानों में ‘मोटी रकम’ की एंट्री के बाद ही इन वाहनों को सुरक्षित रास्ता दिया जाता है। हालांकि, जिला खनन विभाग ने कुछ कार्रवाइयां की हैं, लेकिन माफियाओं के हौसले पस्त करने के लिए वे नाकाफी साबित हो रही हैं।
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