
सरायकेला : उपायुक्त, सरायकेला-खरसावां श्री नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन समिति की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री मुकेश लूणायत, उप विकास आयुक्त-सह-परियोजना निदेशक, आईटीडीए सुश्री रीना हांसदा, अपर उपायुक्त श्री जयवर्धन कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी (सरायकेला एवं चांडिल) तथा सभी अंचलाधिकारीगण उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान अपर उपायुक्त श्री जयबर्धन कुमार द्वारा जिले में विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित प्राप्त आवेदनों की जानकारी प्रस्तुत की गई। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना से संबंधित 20, पानी में डूबने से संबंधित 04, अतिवृष्टि से संबंधित 126, अतिवृष्टि से मृत्यु 03, सर्पदंश से मृत्यु 01 तथा वज्रपात से मृत्यु 02 से संबंधित मामलों सहित विभिन्न आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनके साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न हैं।

बैठक में मामलों पर बिंदुवार चर्चा के उपरांत उपायुक्त ने निर्देश दिया कि नियमानुसार आपदा प्रबंधन के विभिन्न प्रावधानों के अंतर्गत निर्धारित अनुग्रह अनुदान राशि का लाभ मृतक के आश्रितों एवं प्रभावित परिवारों को प्रदान किया जाए।
उन्होंने सभी अंचलाधिकारियों तथा अनुमंडल पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि आपदा प्रबंधन से संबंधित लंबित मामलों की सभी आवश्यक प्रक्रियाएं यथाशीघ्र पूर्ण करते हुए सत्यापन उपरांत जिला स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि प्रभावित एवं पीड़ित परिवारों के आश्रितों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराया जा सके।
साथ ही उपायुक्त ने सभी अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया कि आपदा प्रबंधन से संबंधित प्राप्त आवेदनों की प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूर्ण कर ली जाए। यदि किसी भी आवेदन में आवश्यक दस्तावेजों की कमी अथवा अपूर्णता पाई जाती है, तो संबंधित आवेदकों को आवश्यक सहयोग प्रदान करते हुए अभिलेखों को पूर्ण कराया जाए, ताकि पात्र एवं पीड़ित परिवारों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिकतम एक माह के भीतर उपलब्ध कराया जा सके।
*आपदा प्रबंधन योजनाओं का पंचायत स्तर पर प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने का निर्देश*
उपायुक्त ने कहा कि आपदा पीड़ित परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध हो सके, इसके लिए जिला आपदा प्रबंधन से संबंधित योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार पंचायत स्तर तक सुनिश्चित किया जाए। साथ ही “आपदा के समय क्या करें और क्या न करें” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों एवं विद्यालयों में आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।
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