
धनबाद, 23 फरवरी 2026: धनबाद नगर निगम चुनाव के करीब आते ही कोयलांचल की सियासी जमीन पूरी तरह तप चुकी है। जहां एक ओर हर मेयर प्रत्याशी अपनी रणनीति बनाने, रैलियों का रेला निकालने और वोटों के गणित को सुलझाने में दिन-रात एक किए हुए है, वहीं मेयर प्रत्याशी संजीव सिंह की एक हालिया पहल ने चुनाव की चर्चाओं को एक नया मोड़ दे दिया है।

अक्सर राजनीति में नेताओं को केवल आंकड़ों और जीत-हार की बात करते देखा जाता है, लेकिन संजीव सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस वीडियो में वे किसी बड़ी जनसभा में नहीं, बल्कि एक साधारण मजदूर परिवार के बीच उनकी समस्याओं को सुनते और साझा करते नजर आ रहे हैं।

राजनीति से ऊपर सामाजिक सरोकार
वीडियो में संजीव सिंह को यह कहते सुना जा सकता है कि उनके लिए चुनाव जीतना ही एकमात्र लक्ष्य नहीं है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मेयर बनना एक पद हो सकता है, लेकिन मजदूर भाइयों के साथ खड़े रहना मेरा कर्तव्य है। चुनाव तो आते-जाते रहेंगे, पर यदि संकट की घड़ी में हम अपनों के साथ नहीं खड़े हो सके, तो ऐसी राजनीति का कोई मोल नहीं।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि मजदूर वर्ग धनबाद जैसे औद्योगिक शहर की असली ताकत और रीढ़ की हड्डी है। शहर की चकाचौंध के पीछे इन्हीं पसीने बहाने वाले हाथों का योगदान है, लेकिन अक्सर इन्हें ही इनके अधिकारों से वंचित रखा जाता है।
संजीव सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका प्राथमिक उद्देश्य मजदूरों को उनका हक, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित कराना है।
मजदूर परिवार को दिया सहारा
बताया जा रहा है कि संजीव सिंह को जैसे ही एक मजदूर परिवार पर आए संकट की सूचना मिली, उन्होंने अपने चुनावी कार्यक्रमों को किनारे रखकर सीधे उनसे मिलने का फैसला किया। उन्होंने न केवल उस परिवार की व्यथा सुनी, बल्कि उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से हर संभव सहायता देने का ठोस भरोसा भी दिलाया।
मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि संजीव सिंह की इस पहल में कोई ‘चुनावी दिखावा’ नहीं, बल्कि एक ‘सहज संवेदनशीलता’ नजर आई।
सियासी गलियारों में चर्चा और प्रभाव
चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम ने संजीव सिंह की छवि को एक ‘जननेता’ के रूप में और मजबूत किया है।
धनबाद की राजनीति को करीब से जानने वालों का कहना है:
समर्थकों का रुख: समर्थकों का मानना है कि यह पहल यह संदेश देती है कि संजीव सिंह राजनीति को सत्ता के लिए नहीं, बल्कि सेवा के माध्यम के रूप में देखते हैं।
चुनावी समीकरण: मजदूर वर्ग का एक बड़ा वोट बैंक धनबाद नगर निगम चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में संजीव सिंह का यह सीधा संवाद अन्य प्रत्याशियों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
जहां अन्य प्रत्याशी ऊंचे वादों और नारों के सहारे मैदान में हैं, वहीं संजीव सिंह की यह मानवीय पहल चर्चा का केंद्र बनी हुई है। शहर के चौक-चौराहों पर अब इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या इस बार धनबाद की जनता केवल वादों पर वोट देगी या उस व्यक्ति को चुनेगी जो वास्तव में जमीनी स्तर पर लोगों के सुख-दुख का साथी बनता है।
फिलहाल, संजीव सिंह के इस कदम ने चुनाव की इस तपिश में संवेदनशीलता की एक नई धारा प्रवाहित कर दी है, जिसका असर आने वाले मतदान के नतीजों में स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।
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