
सरायकेला। प्रख्यात साहित्यकार, प्रखर मजदूर नेता और समाजसेवी श्री गोपबन्धु आचार्य का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने 29 जनवरी 2026 को सुबह 11:03 बजे सरायकेला स्थित अपने पैतृक आवास पर अंतिम सांस ली।
उनका जन्म जून 1945 में हुआ था। उनके निधन की खबर से क्षेत्र के बौद्धिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
मजदूरों की आवाज और बहुमुखी व्यक्तित्व
श्री आचार्य राउरकेला स्थित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) में असिस्टेंट फोरमैन के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अपने कार्यकाल के दौरान वे केवल एक कर्मचारी ही नहीं, बल्कि मजदूरों के हक के लिए लड़ने वाले एक सशक्त योद्धा के रूप में पहचाने जाते थे। कंपनी प्रशासन के समक्ष मजदूरों की समस्याओं को निडरता से उठाने के लिए वे सदैव याद किए जाएंगे।
साहित्य के क्षेत्र में अमूल्य योगदान
प्रशासनिक और सामाजिक कार्यों के साथ-साथ श्री आचार्य का झुकाव साहित्य की ओर भी गहरा था। उन्हें अंग्रेजी, जर्मन, संस्कृत और उड़िया भाषा एवं साहित्य की गहरी जानकारी थी। उन्होंने उड़िया भाषा में कई महत्वपूर्ण कृतियों की रचना की, जिनमें प्रमुख हैं:
नाटक: चक्री, निहारिका, कुल चन्द्रमा।
कविता संग्रह: अशेष दुनिया, कॉलेज गलियाँ आदि।
उत्कलमणि आदर्श पाठक में शोक सभा का आयोजन
उनके निधन पर सरायकेला के उत्कलमणि आदर्श पाठक के प्रांगण में एक शोक सभा आयोजित की गई। इस अवसर पर उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
शोक सभा में उपस्थित मुख्य गणमान्य व्यक्ति:
सुशांत महापात्र, जलेश कवि, संदीप पटनायक, चंद्रशेखर कर, सुखलाल मोहंती, चिरंजीव महापात्र, आईठु कर, सुखलाल महांती, काशीनाथ कर, अनूप कुमार रथ, आशुतोष कर, शिव शंभू कवि, कार्तिक कुमार परीक्षा।
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