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मुम्बई से घर लौटा उमेश का शव: जुरामना गांव में मचा कोहराम, मासूमों के सिर से उठा पिता का साया।

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Jan 6, 2026

नावाडीह (बेरमो): नावाडीह प्रखंड के ऊपरघाट स्थित जुरामना गांव में आज उस समय हृदय विदारक दृश्य उत्पन्न हो गया, जब मुम्बई में अपनी जान गंवाने वाले प्रवासी मजदूर उमेष महतो का शव उनके घर पहुँचा। परिजनों के चीत्कार और पत्नी पायल देवी की करूण पुकार ने पूरे गाँव की आँखों को नम कर दिया।

क्या थी घटना? उमेश महतो मुम्बई की ‘एसएन इंजीनियरिंग कंपनी’ में कार्यरत थे। बीते 31 दिसंबर को काम के दौरान विद्युत स्पर्घात (Electric Shock) लगने से उनकी मौत हो गई थी। कंपनी द्वारा मुआवजा देने में आनाकानी करने के कारण उनके साथी मजदूरों ने शव उठाने से इनकार कर दिया था।

मुआवजे के लिए संघर्ष और सफलता क्षेत्र के समाजसेवी भुनेश्वर कुमार महतो और आदर्श श्रमिक एकता सामाजिक संस्था के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलझा। संस्था के हेमंत महतो ने मुम्बई के अस्पताल पहुँचकर कंपनी प्रबंधन से लंबी वार्ता की। समझौते के तहत:

नकद मुआवजा: परिजनों के खाते में तत्काल 3 लाख 21 हजार रुपये भेजे गए।

अतिरिक्त लाभ: बीमा का लाभ और ईपीएफ (EPF) के माध्यम से परिजनों को आजीवन पेंशन देने पर सहमति बनी।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ उमेश अपने पीछे दिव्यांग पिता नारायण महतो, माता मुनिया देवी, पत्नी और दो मासूम बच्चों (ढाई वर्षीय युवराज और नौ माह के धीरज) को छोड़ गए हैं। उमेश ही परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। शव पहुँचते ही स्थानीय विधायक जयराम महतो उनके घर पहुँचे और शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी।

पलायन पर उठे सवाल समाजसेवी भुनेश्वर महतो ने झारखंड सरकार और जनप्रतिनिधियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि प्रवासी मजदूरों की मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार स्थानीय स्तर पर रोजगार देने में विफल रही है, जिसके कारण मजदूरों को अपनी जान जोखिम में डालकर पलायन करना पड़ता है। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से इस ओर ठोस नीति बनाने की अपील की।


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