
रिपोर्ट,अरुण कुमार सैनी

केंदुआ। कोयलांचल में भू धंसान गैस रिसाव की घटना एवं इससे प्रभावितों का दुःख दर्द समझने वाले गोधर निवासी झारखंड आंदोलनकारी हरिपद रवानी ने लोगों को जागरूक करने को लेकर पीड़ितों के हित मे एक संदेश जारी किया है। जिसमे उन्होंने कहा है मेरे प्यारे भाईयों बहनों साथियों व कोयलांचल के भू धंसान गैस रिसाव के पीड़ित साथियों को नमस्कार,मैं भी पीड़ित परिवार हूँ।

और मैं सभी को आवगत कराता हूँ की गोधर रवानी बस्ती में 5 फरवरी 1999 में 40 घर की पीड़ा दर्द आज भी जग जाता है। उन्होंने कहा कि मैं दुख के साथ अपनी ब्यथा प्रस्तुत कर रहा हूँ कि झरिया कोयलांचल में सन 1916 में आग लगी थी और आज 109 वर्ष हो रहा है। भारत सरकार ने ऊपरी सतह को बचाने के लिए और भूमिगत खदान से पूर्णरूपेण कोयला निकलने के कुशल वैज्ञानिक तकनीशियन के अथक प्रयास से 1961-1963 ईस्वी में कोल बोर्ड द्वारा पुनरीक्षित प्रस्तावित रज्जुपथ का निर्माण हुआ जो सफलीभूत भी रहा। किंतु दुष्ट,कुचरित्र,क्षुद्र,विचार लोगों के साजिस से बंद करवा दिया गया। उन्होंने कहा कि कोल बोर्ड रोपवे का निर्माण इसलिए हुआ था कि बालू भराई कर ऊपरी भाग को बचाया जा सके और आग पर नियंत्रण हो सके। इसके लिए रैयतों ने अपनी उपजाऊ जमीन दिया और आज वही रैयत भू धंसान जमींदोज गैस रिसाव के चपेट में है। गैस खाकर मृत्यु शैया में जा रहे है।
प्रताड़ित हो रहे है। इस दौरान झरिया राजा शिव प्रसाद कॉलेज को भी नही बचाया जा सका। हमारे देश के महान विभूति राष्ट्रपति मिसाइलमैन निःस्वार्थ समाजसेवी,प्राध्यापक ए पी जे अब्दुल कलाम आज भी टीवी में पढ़ते नजर आते,मन तरो ताजा हो जाता। उन्होंने भी सन 2000 में धनबाद दौरे में ऐना कोलियरी आए थे और निरीक्षण किये थे। वे यदि आज जीवित होते तो बहुत दुखित होते। उन्होंने कोल इंडिया चेयरमैन बीसीसीएल को आग पर काबू पाने के लिए आगाह किये और कई दिशा निर्देश भी दिए थे। आज 25 वर्ष में आग पर नियंत्रण क्या और भयावह रूप ले लिया। इसे हम क्या सोचेंगे सोची समझी साजिश या जानबूझकर लापरवाही।
क्या यह प्रकृति आपदा या सोची समझी साजिश या मानवीय भूल ।किसी भी आपदा घटना दुर्घटना से पहले सचेत रहने की आवश्यकता है पर ऐसा नही हुआ। आज 109 वर्ष में जब दर्दनाक घटनाएं हो रही है तब कोयला मंत्री,कोल सचिव,कोल इंडिया चेयरमैन मिनिरत्न कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड,जेआरडीए धनबाद,डीजीएमएस,मानव संसाधन सबों की नीद खुली है और अपनी घड़ियाली आंसू बहा रही है उनकी इस घड़ियाली आंसू से आग नही बुझेगी या गैस रिसाव नही थमेगी और न ही भू धंसान रूकेगी। एक दिन ऐसा आएगा कि मौत के गाल से कोई नही बच पाएगा कुछ ही दिन का इंतजार है यह गैस रिसाव 3 दिसंबर 1984 भोपाल जैसी त्रासदी घटना को आमंत्रण दे रहा है।
कोल इंडिया चैयरमैन, डीजीएमएस,सीएमडी अडानी जैसे बड़े बड़े उधोगपति ट्रेड यूनियन को यहां के भूमि से रैयतों से क्या मतलब उनका तो एक बिता जमीन भी नही पर जमीन की दलाली में सर्व प्रथम मसीहा बने रहते है। 23 अगस्त 2018 को कोल सचिव माननीय इंद्रजीत सिंह दौरा किए 17 दिसंबर 2022 को कोल सचिव अमृतलाल मीना जी का दौरा 13 जुलाई 12023 को कोयला मंत्री प्रह्लाद वेंकटेश जोशी का दौरा 25 जुलाई को कोयला मंत्री किशन रेड्डी का दौरा 4 मई 2025 को कोयला खान राज्य मंत्री शतीश चन्द्र दुबे का दौरा हुआ। केंद्रीय कोयला सचिव विक्रम देवव्रत 27/28 नवंबर 2025 को मंत्री जी समीक्षा बैठक में कहा कि ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के लिए देश को कोकिंग कोल की आवश्यकता है।बीसीसीएल कोकिंग कोल का भंडार है ऐसे में बीसीसीएल वाशरी पर फोकस करें। कोल का उत्पादन बढ़ाएं। अधिक से अधिक कोयला वाशरी को दें ताकि कोकिंग कोल के उत्पादन के उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ आयात शून्य हो सके।
किंतु 109 वर्षों से जलता हुआ कोयलांचल और आम नागरिक जो रोज रोज मरते मरते जी रहे हैं उनके प्रति किसी का ध्यान ही नही गया सिर्फ व सिर्फ कोल इंडिया के हित मे ध्यान रहा है। उन्होंने कहा है कि कोयला क्षेत्र में सबका मालिक एक मात्र चेयरमैन है जो सिर्फ तालिबानी फरमान जारी करते है इससे रैयत अपनी पूर्वजों की जमीन को छोड़कर नही भाग जाएंगे आखिर रैयतों की भूमि असुरक्षित क्यों और कैसे हुआ इसके राहत के उपाय क्यों नही किये गए। आज के दिन मात्र मंत्रियों, कोल इंडिया चएरमैन,नेताओं के दौरे भू धंसान की चर्चित घटनाएं है। वहीं केंदुआडीह राजपूत बस्ती 21/01/1983 एवं 23/10/2020 इसके पूर्व 26 सितंबर 1995 में केंदुआ झरिया रोड बीसीसीएल अस्पताल के निकट चौरसिया दंपत्ति जमीन के अंदर समा गए इसका कुछ पता नही चला इसी प्रकार गजली टांड़ खान दुर्घटना में 65 कोयला श्रमिकों ने एक साथ जल समाधि ले ली। उन्होंने कहा कि दिनांक 20/08/2010 को एरिया 6 में संचालित डेको कंपनी ने जलता हुआ कोयला डंप कर आग लगा दिया। ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन के बाद बीसीसीएल प्रबंधन 254 करोड़ का आश्वाशन दिया कि एन एच 32 और बस्ती बचाने का प्रयास करेंगे। 2017 में केंदुआ धनबाद मुख्य मार्ग से सटे कुर्मिडीह बस्ती में भू धंसान हुई। वर्ष 2021 में गनसाडीह 3 नंबर बस्ती में हुई भू धंसान में निवासी उमेश पासवान गोफ में समा गए जिसका इलाज के दौरान मौत हो गई। 21 अगस्त 2023 को कुसुंडा केडीएस साइडिंग से कुछ दूरी पर गोधर 6 नंबर अग्नि प्रभावित क्षेत्र में रह रहे दैनिक मजदूर विनोद विश्वकर्मा के वाशरूम में लगभग साढ़े चार फीट के दायरे में गहरा भू धंसान हो गया जहां आज भी आसपास में आग की लपटें बरकरार है। जिसे बुझाने का कोई विकल्प नही हो रहा है। जिससे वर्तमान में भी लगी आग लहलहाती दिख रही है। उन्होंने कहा कि एरिया 6 के तत्कालीन महाप्रबंधक वी के गोयल को भी आग की सूचना दी गई थी की डीएवी स्कूल के आगे लहलहाती आग दिख रही है यदि उसे तत्काल बालू पानी देकर आग पर काबू पाने से डीएवी स्कूल में 2500 की संख्यां में छात्र छस्त्राएँ व शिक्षक शिक्षिकाएं है जिन्हें राहत मिल सकता है परंतु प्रबंधन दो चार गाड़ी बालू गिराकर फर्ज निभाई।खानापूर्ति हो गया जहां वर्तमान में भी गैस रिसाव जारी है। उन्होंने कहा कि इसी तुगलकी फरमान के चलते 27 अप्रैल 2011 में मटकुरिया गोली कांड हुआ जिसमें बीसीसीएल को 40 करोड़ का क्षति हुई,36 लाख के पुलिस वज्र वाहन जला, गोधर कुसुंडा कार्यालय जला,चार निर्दोष व्यक्तियों की मौत हुई,पुलिस अधीक्षक आर के धान साहब घायल हुए,कर्फ्यू लगा,फिर भी कोयलांचल की भूमि सुधार नही हुई।आज भी झरिया कोयलांचल सुरक्षित नही है। आग प्रभावित सभी इलाकों में सभी वर्ग के लोग त्राहिमाम कर रहे है। वहीं हाल के दिनों में 3 दिसंबर से लगातार केंदुआडीह राजपूत बस्ती,मस्जिद मुहल्ला,इमामबाड़ा, नया धौड़ा के गैस रिसाव में कोई सुधार नही दिख रही है। यदि समय रहते उचित कार्रवाई नही हुई तो न जाने आगे क्या मुसीबत हो सकती है।
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