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सरायकेला: CSR और DMFT फंड का उपयोग न होने से आदिवासी समाज ठगा हुआ महसूस कर रहा है; आदिम डेवलपमेंट सोसाइटी ने DC से मिलकर कार्रवाई की मांग की

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Byadmin

Nov 5, 2025

 

सरायकेला: आदिम डेवलपमेंट सोसाइटी, झारखंड ने सरायकेला-खरसावां जिले में स्थापित उद्योगों और खनन कार्यों से प्राप्त फंडों का उपयोग आदिवासी समुदाय के विकास में न होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। गम्हरिया में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में सोसाइटी ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

 

सोसाइटी के संयोजक श्री राम हाँसदा और सचिव बाबूराम सोरेन की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में बताया गया कि जिले में आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन का उपयोग कर हजारों उद्योग स्थापित किए गए हैं।

 

CSR फंड का उपयोग शून्य

सोसाइटी ने दावा किया कि कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 135 और झारखंड CSR नियमावली 2020 के तहत, कंपनियों को अपने औसत लाभ का 2% राशि CSR गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य है।

 

आरोप: इसके बावजूद, सरायकेला-खरसावां जिले में CSR के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन और शुद्ध पेयजल उपलब्धता जैसे सामाजिक विकास के कार्यों पर खर्च नाम मात्र शून्य दिखाई दे रहा है।

 

परिणाम: सोसाइटी ने कहा कि प्रभावी रूप से CSR नीति लागू न होने के कारण आदिवासी समाज ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

 

DMFT फंड का दुरुपयोग

सोसाइटी ने बताया कि जिले में खनन कार्य जोरों से चल रहा है। राज्य सरकार द्वारा खनन से प्राप्त राजस्व को जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड में जमा किया जाता है, जिसका उपयोग खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास कार्यों में होना चाहिए। हालांकि, सोसाइटी का आरोप है कि DMFT फंड का भी सदुपयोग नहीं हो रहा है।

 

अगला कदम

आदिम डेवलपमेंट सोसाइटी झारखंड ने निर्णय लिया है कि सोसाइटी का एक प्रतिनिधि मंडल जल्द ही उपायुक्त, सरायकेला-खरसावां से मिलकर एक ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञापन में CSR और DMFT फंड के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने और उनका सदुपयोग सुनिश्चित करने की मांग की जाएगी।

 

संवाददाता सम्मेलन में रविन्द्र बास्के, बनमाली हांसदा, शंकर मार्डी, बाबु राम मार्डी, बिजय मुर्मू, सुनिल मार्डी, और सुदन टुडू सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।


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