
मोकामा : राजनीतिक रूप से गतिशील बिहार में अति पिछड़ा वर्ग के उभरते युवा नेता पियूष प्रियदर्शी ने राजद से टिकट न मिलने के बाद अब जन सुराज के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। प्रशांत किशोर ने उन्हें आधिकारिक रूप से अपनी पार्टी से टिकट की पुष्टि कर दी है।
इससे पहले पियूष प्रियदर्शी ने लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लगभग 30 हजार वोट प्राप्त कर राजनीतिक क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी।

राजद के प्रदेश अध्यक्ष मागनी लाल मंडल और तेजस्वी यादव से उनके लंबे समय तक संपर्क और बातचीत के चलते यह माना जा रहा था कि पियूष का टिकट राजद से कन्फर्म है। स्थानीय स्तर पर उन्हें विनिंग कैंडिडेट के रूप में देखा जा रहा था क्योंकि उनके नेतृत्व में अति पिछड़ा वर्ग का सशक्त ध्रुवीकरण हो रहा था।

परंतु, अंतिम क्षण में राजद ने अनंत सिंह को टक्कर देने के लिए सूरजभान पर दाव लगाकर पियूष को टिकट नहीं दिया, जिससे स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों में असंतोष फैल गया।
अब पियूष प्रियदर्शी के जन सुराज से चुनाव लड़ने का निर्णय समीकरण को पूरी तरह बदल सकता है। उनके अति पिछड़ा वर्ग में प्रभाव और जन सुराज द्वारा दिए गए मंच के कारण अगड़ा-पिछड़ा वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना बढ़ गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस क्षेत्र में पियूष का जनाधार, उनकी सक्रियता और जन सुराज की रणनीतिक मजबूती उन्हें जीत की प्रमुख उम्मीद बना रही है। यह चुनाव अब अति पिछड़े नेतृत्व के उदय और पारंपरिक दलों की पकड़ कमजोर होने का संकेत दे सकता है।
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