
बोकारो से अविनाश कुमार की रिपोर्ट

बेरमो (झारखंड)। सामाजिक कार्यकर्ता विकास कुमार गुप्ता आज पूरे इलाके में “झारखंड के सोनू सूद” के नाम से जाने जाते हैं। वजह साफ है — उनकी पहल और बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद की मदद से राज्य के कई गरीब और जरूरतमंद परिवारों की जिंदगी बदल गई। कभी भूख से जूझते परिवार को राशन मिला, तो कभी इलाज के लिए पैसे पहुँचे, किसी को पढ़ाई का सहारा मिला, तो किसी मासूम की जान बच गई।

विकास गुप्ता का मानना है – “जरूरतमंद की मदद करने के लिए जेब नहीं, जज़्बे की जरूरत होती है।” यही जज़्बा उन्हें लगातार लोगों की सेवा के लिए प्रेरित करता है।
मदद की वो कहानियाँ जो मिसाल बन गईं
केस स्टडी 1: बीमारी और गरीबी से मौतों के बाद पहुँची राहत
बोकारो कसमार के भूखल घासी और उनकी बेटी की मौत गरीबी व बीमारी से हो गई। परिवार में एक साल के भीतर छह लोगों की मौत होना बेहद कष्टदायक था। खबर मिलते ही विकास गुप्ता ने सोनू सूद को जानकारी दी। सोनू ने तुरंत संज्ञान लेकर राहत सामग्री परिवार तक पहुँचाई।
केस स्टडी 2: संजय कादू की आंखों में रोशनी लाने की कोशिश
जरीडीह बाजार निवासी स्व. संजय कादू ने बीमारी की वजह से दोनों आंखों की रोशनी खो दी थी। विकास गुप्ता ने मामला सोनू सूद तक पहुँचाया। सोनू ने ट्वीट कर कहा – “चलिए आज दिन की शुरुआत इनकी आंखों में रोशनी लाने से करते हैं।” हालांकि इलाज से पहले ही संजय की तबीयत बिगड़ गई और उनका निधन हो गया।
केस स्टडी 3: सपना की पढ़ाई के लिए मोबाइल फोन
बेरमो की सपना कुमारी लॉकडाउन में पढ़ाई से वंचित हो रही थी क्योंकि उसके पास ऑनलाइन क्लास के लिए मोबाइल नहीं था। विकास गुप्ता ने यह बात सोनू सूद तक पहुँचाई। सोनू ने ट्वीट कर कहा – “सिम कार्ड तैयार रखो।” एक हफ्ते में सपना को नया एंड्रॉइड मोबाइल मिला। फोन पाकर सपना की आंखों में खुशी झलक उठी।
केस स्टडी 4: मासूम राजवीर को मिला नया जीवन
जरीडीह बाजार निवासी आशुतोष वर्मा का 9 माह का बेटा राजवीर दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। पैसे की कमी से इलाज असंभव था। सोनू सूद ने कहा – “पैसे के अभाव में किसी का इलाज ना रुके।” इसके बाद राजवीर का मुंबई के वाडिया हॉस्पिटल में ऑपरेशन हुआ और वह स्वस्थ हुआ। सोनू ने ट्वीट किया – “एकदम हीरो लग रहा है छोरा।”
केस स्टडी 5: विनायक की पढ़ाई का खर्च उठाया
स्व. विनोद कुमार वर्मा के बेटे विनायक (11वीं के छात्र) की फीस भरने के लिए घर में पैसे नहीं थे। विकास गुप्ता की पहल पर सोनू सूद की टीम ने पाँच माह की फीस स्कूल में जमा कर दी।
केस स्टडी 6: सुरभि देवी को मिली आर्थिक मदद
जरीडीह बाजार की सुरभि देवी अपने बच्चे के इलाज तक के पैसे नहीं जुटा पा रही थीं। विकास गुप्ता ने सोनू सूद को जानकारी दी और तुरंत उनके खाते में आर्थिक सहायता भेजी गई।
केस स्टडी 7: बीमार व घायल को मिला सहारा
बेरमो के शिवनंदन कुमार के मस्तिष्क इलाज के लिए सोनू सूद की टीम ने आर्थिक मदद दी।
जैनामोड़ के रविंद्र कुमार सिंह सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। उनकी भी आर्थिक मदद सोनू सूद की ओर से पहुँची।
केस स्टडी 8: नीलांजना को मिली साइकिल
खरसावां जिले की नीलांजना पॉल रोज पैदल 1 किलोमीटर स्कूल जाती थी। विकास गुप्ता ने मामला सोनू सूद को बताया। एक सप्ताह में नीलांजना को नई साइकिल भिजवाई गई। सोनू सूद ने मज़ाक में कहा – “कभी आऊंगा तो साइकिल से घुमा देना।”
केस स्टडी 9: अमित प्रमाणिक को भी साइकिल का तोहफा
चांडिल निवासी अमित प्रमाणिक रोज 5 किलोमीटर पैदल स्कूल जाता था। सोनू सूद ने उसके लिए भी नई साइकिल भेजी। अमित ने खुशी जताते हुए कहा – “अब मैं रोज स्कूल जाऊंगा, सोनू भैया और विकास भैया को धन्यवाद।”
केस स्टडी 10: पावभाजी के ठेले तक पहुँचे सोनू सूद
जयपुर निवासी बलराम सिंह शेखावत ने अपने फास्ट फूड कॉर्नर का नाम “सोनू सूद फास्ट फूड” रखा। विकास गुप्ता ने इसकी जानकारी सोनू तक पहुँचाई। सोनू ने ट्वीट किया – “आऊंगा जरूर, पावभाजी में मक्खन थोड़ा ज्यादा लगाना।” बाद में सोनू सूद खुद दुकान पर पहुँचे और पावभाजी खाकर लोगों को चौंका दिया।
इंसानियत की अनोखी साझेदारी
विकास गुप्ता की मदद की सूची बहुत लंबी है। वे हर साल सोनू सूद का जन्मदिन धूमधाम से मनाते हैं। इस अवसर पर सोनू सूद वीडियो कॉल के जरिए बच्चों से जुड़ते हैं।
झारखंड में लोग मानते हैं कि विकास गुप्ता और सोनू सूद मिलकर इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश कर रहे हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
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