
बिहार में हाल के दिनों में अपराधों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बढ़ती आपराधिक गतिविधियों में पटना के एक अस्पताल में एक अपराधी की हत्या जैसी घटनाएं भी शामिल हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती हैं।

इस चिंताजनक स्थिति पर बिहार के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) कुंदन कृष्णन ने एक बयान दिया, जिसने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। एडीजी कृष्णन ने अपराध में वृद्धि को एक “ऐतिहासिक प्रवृत्ति” बताते हुए इसे “रोजगार रहित” किसानों से जोड़ दिया। उनका तर्क था कि खेती-किसानी से जुड़े लोग, जब उनके पास काम नहीं होता, तो वे अपराध की ओर मुड़ जाते हैं।

एडीजी के इस बयान की केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कड़ी आलोचना की है। पासवान ने एडीजी के बयान को किसानों के सम्मान के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि अन्नदाता को अपराध से जोड़ना निंदनीय है और यह किसानों के प्रति पुलिस प्रशासन की सोच को दर्शाता है। चिराग पासवान ने सरकार से इस मामले में संज्ञान लेने और एडीजी के बयान पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में अपराध नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। एडीजी का बयान न केवल किसानों के एक बड़े वर्ग को ठेस पहुंचा रहा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि राज्य की पुलिस व्यवस्था इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए किस तरह के तर्कों का सहारा ले रही है। इस पर सरकार और प्रशासन को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है, ताकि अपराध पर लगाम लगाई जा सके और ऐसी टिप्पणियों से बचा जा सके जो समाज के किसी वर्ग को अपमानित करती हों।
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