
सरायकेला में ओल चिकी लिपि के 100वें वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘मिशन ओल चिकी – 2025’ के तहत संथाली प्रतिभा खोज परीक्षा का आयोजन किया गया। झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से 173 विद्यार्थियों ने इस परीक्षा में भाग लिया।

चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के शाहरबेड़ा स्थित उत्क्रमित विद्यालय में आयोजित इस परीक्षा का उद्देश्य ओल चिकी लिपि के महत्व को बढ़ावा देना, इसके आविष्कारक गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू की लिपि को जन-जन तक पहुंचाने की सोच और विकास को आगे बढ़ाना है। साथ ही, इस प्रतिभा खोज के माध्यम से विद्यार्थियों को सम्मानित करना भी लक्ष्य है।

उत्क्रमित मध्य विद्यालय शहरबेड़ा, चांडिल में संपन्न हुई इस परीक्षा को सफल बनाने में सत्य नारायण Socio Economic & Research Centre ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। TCS OL इतुन आसड़ा रामगढ़ ने भी आयोजन में सहयोग प्रदान किया। सचिव सत्यनारायण मुर्मू, परीक्षा नियंत्रक शंकर मुर्मू और कोऑर्डिनेटर बद्रीनाथ मार्डी एवं रतन मार्डी ने परीक्षा को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया। ओल चिकी शिक्षक सत्य रंजन सोरेन, नरेंद्र मांझी और गोल्डन टुडू आदि ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर यह चिंता भी व्यक्त की गई कि सरकार की अनदेखी के कारण ओल चिकी लिपि विलुप्त होने के कगार पर है, जबकि पंडित रघुनाथ मुर्मू की सोच इसे जन-जन तक पहुंचाना था। वक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आज तक प्राइमरी से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक ओल चिकी लिपि की पढ़ाई की व्यवस्था नहीं की गई है और शिक्षकों की बहाली भी नहीं हुई है।
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