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बिहार के सरकारी स्कूलों में बड़े बदलाव की तैयारी

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ByBiru Gupta

Jan 13, 2025

 

 

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में बड़े बदलाव की तैयारी है। नए शैक्षणिक सत्र से पहले राज्य के 81 हजार सरकारी विद्यालयों की रैंकिंग की जाएगी। शिक्षा विभाग के मुताबिक मार्च में विद्यालयों की रैंकिंग कराई जाएगी। यह रैंकिंग प्रत्येक विद्यालय के समग्र प्रदर्शन के आधार पर होगा।

 

इसमें विद्यालयों में संचालित विभिन्न गतिविधियों जैसे-शिक्षण और अधिगम, संसाधन उपयोग, साफ-सफाई, स्वच्छता, शिकायत निवारण आदि शामिल किए गए हैं जिसके लिए कुल 100 भारांक तय किए गए हैं।

 

शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में 43 हजार प्राथमिक विद्यालय हैं, जहां पहली से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। 29 हजार मध्य विद्यालय हैं, जहां पहली से आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है।

 

नौ हजार 360 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं, जहां नौवीं से बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है। प्रत्येक कोटि के विद्यालय के लिए अलग-अलग रैंकिंग की जाएगी। इसलिए प्राथमिक, मध्य और माध्यमिक विद्यालयों के लिए अलग-अलग फार्मेट भी उपलब्ध कराए गए हैं।

 

*रैंक के आधार पर वन से फाइव स्टार तक के होंगे विद्यालय*

 

शिक्षा विभाग की ओर से मार्च में विद्यालयों को होने वाली रैंकिंग को लेकर नवंबर में ही सभी प्रधानाध्यापकों, प्रभारी प्रधानाध्यापकों और प्रधान शिक्षकों को दिशा-निर्देश जारी किया जा चुका है। रैंक के आधार पर चन से फाइव स्टार तक के विद्यालय होंगे।

 

*85 से 100 नंबर हासिल करने वाले 5 स्टार स्कूल कहलाएंगे*

 

रैंकिंग में 85 से 100 भारांक हासिल करने वाले विद्यालयों को ए प्लस ग्रेड के साथ फाइव स्टार, 75 से 84 भारांक हासिल करने वाले विद्यालयों को ए ग्रेड के साथ फोर स्टार, 50 से 74 भारांक हासिल करने वाले विद्यालयों को बी ग्रेड के साथ थ्री स्टार, 25 से 49 भारांक हासिल करने वाले विद्यालयों की सी ग्रेड के साथ टू स्टार एवं 0 से 24 भारांक हासिल करने वाले स्कूलों को डी ग्रेड के साथ वन स्टार मिलेगा।

 

*रैंकिंग देने से शिक्षा व्यवस्था में आएगा सुधार*

 

स्कूलों की रैंकिंग करने से छात्रों का भी मूल्यांकन हो जाएगा जिससे शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार होगा। कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान देकर उन्हें मजबूत बनाने की कोशिश की जाएगी। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आए दिन वीडियो कॉलिंग से खुद निगरानी कर रहे हैं और हर स्कूल की रिपोर्ट ले रहे हैं। कई बार उन्होंने सवाल-जवाब भी किए हैं।


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