
पटना: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं परीक्षा को कैंसिल करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों के साथ ही चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी आमरण अनशन पर बैठे हैं. उन्होंने नीतीश सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था और अल्टीमेटम के बाद वह गांधी मैदान में अनशन पर बैठ गए हैं. इसको लेकर अब जिला प्रशासन ने बड़ा बयान देते हुए कार्रवाई के संकेत दिए हैं.

*प्रशांत किशोर के धरने पर क्या बोले डीएम?:*

प्रशांत किशोर के गांधी मैदान में चल रहे धरना पर पटना डीएम ने कहा कि साल 2015 में माननीय उच्च न्यायालय ने धरना प्रदर्शन के लिए गर्दनीबाग की जगह को चिह्नित किया था. गांधी मैदान एक सार्वजनिक जगह है. यहां लोग एक साथ घूमने जा सकते हैं, लोग एक साथ दौड़ सकते हैं, मॉर्निंग वॉक कर सकते हैं या फिजिकल की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी एक साथ दौड़ सकते हैं.
*परीक्षा के बाद हो सकती है कार्रवाई:*
पटना डीएम ने कहा कि राजनीतिक दल रैली के लिए गांधी मैदान का इस्तेमाल करते हैं और वह भी इसके लिए अनुमति लेते हैं. इसके बाद रैली के आयोजन में जिला प्रशासन भी सहयोग करता है और जरूरी प्रबंधन करता है. अभी तक राजनीतिक दलों की ओर से गांधी जी के प्रतिमा के नीचे प्रदर्शन का मामला नहीं आया था. ऐसा प्रदर्शन नया है.
*पीके पर एफआईआर:*
प्रशांत किशोर के ऊपर कार्रवाई के संबंध में कहा कि एफआईआर दर्ज किया गया है. अभी तक प्राथमिकता थी कि आज की परीक्षा का सफलतापूर्वक आयोजन कर लिया जाए. परीक्षा की समाप्ति के बाद वह देखेंगे और जो भी जरूरी कार्रवाई होगी की जाएगी. गांधी मैदान में प्रदर्शन की जगह भी मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है ताकि लोक व्यवस्था प्रभावित न हो.
*22 केंद्रों पर परीक्षा:*
बता दें कि बीपीएससी अभ्यर्थी 70वीं प्रारंभिक परीक्षा दोबारा कराने की मांग को लेकर पिछले तीन सप्ताह से आमरण अनशन पर हैं. शनिवार 4 जनवरी 2025 को बीपीएससी ने 22 केंद्रों पर फिर से परीक्षा ली. यह एग्जाम उन अभ्यर्थियों के लिए है जिनकी 13 दिसंबर 2024 को परीक्षा रद्द हो गई थी. सेंटर में हंगामे के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी.
*”गांधी मैदान धरना प्रदर्शन की जगह नहीं है. गांधी मैदान में गांधी मूर्ति के नीचे धरना प्रदर्शन प्रतिबंधित क्षेत्र है. आज तक इससे पहले ऐसा नहीं हुआ था. बीपीएससी की परीक्षा के बाद पूरे मामले को देखा जाएगा. रैली की अनुमति देते हैं, लेकिन धरना के लिए अनुमति नहीं देते हैं. उन्हें नोटिस भेजा गया था. उनके जवाब का इंतजार कर रहे थे.”- डॉ चंद्रशेखर सिंह, डीएम,पटना*
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