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विधानसभा चुनाव को लेकर नक्सली संगठनों की गतिविधियां बढ़ीं, तो पुलिस भी हो गयी रेस

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ByAdmin Office

Nov 4, 2024

 

गिरीडीह : मिली जानकारी के अनुसार गिरिडीह जिले में पारसनाथ के साथ-साथ झारखंड-बिहार की सीमा पर स्थित देवरी, गावां और तिसरी के इलाके में संगठन ने अपनी गतिविधियां बढ़ाने का निर्णय लिया है. शनिवार को झारखंड-बिहार की सीमा पर स्थित चिहरा थाना क्षेत्र के गुरूड़बाद के पास बिहार की पुलिस ने जिस 20 किलो आइइडी को बरामद किया है, वह झारखंड में खपाने की कोशिश की जा रही थी.

 

एक ओर विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष तरीके से निपटाने के लिए जिला प्रशासन के साथ-साथ पुलिस प्रशासन ने भी सघन अभियान चला रखा है. वहीं दूसरी ओर अपनी पांव उखड़ता देख नक्सलियों ने भी विधानसभा चुनाव में उपस्थिति दर्ज कराने की योजना बनायी है.मिली जानकारी के अनुसार गिरिडीह जिले में पारसनाथ के साथ-साथ झारखंड-बिहार की सीमा पर स्थित देवरी, गावां और तिसरी के इलाके में संगठन ने अपनी गतिविधियां बढ़ाने का निर्णय लिया है. शनिवार को झारखंड-बिहार की सीमा पर स्थित चिहरा थाना क्षेत्र के गुरूड़बाद के पास बिहार की पुलिस ने जिस 20 किलो आइइडी को बरामद किया है, वह झारखंड में खपाने की कोशिश की जा रही थी. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार झारखंड-बिहार की सीमा पर पुलिस ने दोनों ओर से अपनी गतिविधियां तेज कर दी है और इन्हीं पुलिस के जवानों को निशाना बनाने के फिराक में नक्सली लगे हुए हैं. हालांकि बड़ी घटना को अंजाम देने के पूर्व ही पुलिस ने गरूड़बाद गांव के पास एक झाड़ी में छिपाये गये शक्तिशाली आईईडी को बरामद कर लिया है. हालांकि इस बरामदगी के बाद पुलिस के कान खड़े हो गये हैं. पुलिस ने बरामद आइइडी को लेकर कई जानकारियां हासिल की है. बताया जा रहा है कि आइइडी में जिस टीन और छड़ का इस्तेमाल किया गया है, वह गिरिडीह जिले से संबंधित है. साथ ही जिस तरह का शक्तिशाली आईईडी बम बनाया गया है, वह किसी जानकार और एक्सपर्ट के द्वारा तैयार किया जाता है. पुलिस अब उसकी तालाश में जुट गयी है जिसने इस आईईडी के निर्माण में अपनी भूमिका निभायी है और जमुई के इलाके में छिपाया है. आइइडी बरामद होने के बाद झारखंड पुलिस को भी अलर्ट कर दिया गया है.

 

पुलिस ने तेज किया अभियान

झारखंड-बिहार की सीमा पर चीहरा थाना क्षेत्र के गुरूड़बाद में शक्तिशाली आइइडी बरामद होने के बाद गिरिडीह के भेलवाघाटी पुलिस व सशस्त्र सीमा बल एसएसबी के द्वारा सीमाई क्षेत्र में नक्सल उन्मूलन अभियान तेज कर दिया गया. रविवार को चलाए गए अभियान के दौरान जवानों के भेलवाघाटी थाना क्षेत्र डुमरबकी, पिपरा, बुतरुआटांड़, हथगढ़, चिरुडीह आदि गांव व जंगली इलाके को खंगाला गया. अभियान के दौरान नक्सल गतिविधि की जानकारी ली गयी.

 

बिहार में लौटने की कोशिश कर रहा अरविंद

मिली जानकारी के अनुसार रामदयाल महतो के समर्पण करने के बाद पारसनाथ के इलाके में रणविजय, साहेबराम और अरविंद माओवादी संगठन की जिम्मेदारी निभा रहा है. पारसनाथ क्षेत्र में पुलिस की गतिविधियां बढ़ जाने के कारण नक्सली कोई घटना को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं. अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नक्सलियों ने कई बार योजनाएं बनायी है, लेकिन वे उसे धरातल पर उतार पाने में असमर्थ हैं. बताया जाता है कि इस इलाके में नक्सलियों के पांव बिल्कुल उखड़ चुके हैं. सूत्रों का कहना है कि झारखंड विधानसभा चुनाव को देखते हुए नक्सली एक बार पुन: अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में हैं ताकि ग्रामीणों के बीच संगठन का दहशत बना रहे. उधर झारखंड बिहार की सीमा पर मतलू उर्फ मतला कोड़ा की गिरफ्तारी के बाद संगठन का कार्य बिल्कुल कमजोर हो गया है. इस इलाके में मतलू संगठन के विस्तार में लगा हुआ था. लेकिन पुलिस ने मतलू को हिमाचल प्रदेश से 15 दिनों पूर्व ही गिरफ्तार किया है. इसकी गिरफ्तारी के बाद संगठन का कार्य काफी प्रभावित हुआ है. यही कारण है कि पारसनाथ के इलाके से अरविंद झारखंड-बिहार के इलाके में वापस लौटना चाहता है. संगठन विस्तार के लिए एमसीसी अरविंद को इस इलाके में लाने की योजना बना रहा है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पारसनाथ के इलाके में नक्सलियों का एक दस्ता पिछले कुछ दिनों से सक्रिय हुआ है. इस दस्ते में 8-10 की संख्या में नक्सलियों को देखा गया है. इसी दस्ते को चुनाव के दौरान अपनी उपस्थिति दर्ज करने की जिम्मेदारी दी गयी है.

माओवादियों का संगठन कमजोर, लेवी वसूली प्रभावित

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस पारसनाथ के इलाके में नक्सलियों का ट्रेनिंग सेंटर के साथ-साथ उच्च स्तरीय बैठक होती थी, उस इलाके में नक्सली गतिविधियां बिल्कुल समाप्त होने की स्थिति में है. 2016 के बाद इस इलाके के कुख्यात नक्सलियों ने या तो समर्पण कर दिया या पुलिस को दबोचने में कामयाबी मिली. जमीन से पांव उखड़ जाने के कारण नक्सलियों में काफी बौखलाहट है. बताया जाता है कि अब इसका असर सीधे नक्सलियों के लेवी उगाही के साथ-साथ अन्य गतिविधियों पर भी पड़ी है. क्षेत्र में चल रहे विकास योजनाओं में ठेकेदारों ने लेवी देने में आनाकानी करना शुरू कर दिया है. जो ग्रामीण किसी जमाने में नक्सलियों के लिए मुखबिरी का कार्य करते थे, वे अब पुलिस के लिए काम कर रहे हैं. हाल के दिनों में पुलिस को नक्सली क्षेत्र में सूचना स्रोत विकसित करने में काफी सफलता मिली है और पुलिस ने भी अपनी गतिविधियां नक्सल क्षेत्र में बढ़ा दी है. सूत्रों ने बताया कि पारसनाथ के इलाके में लगभग 200 एकड़ जमीन सामंतवादियों से जब्त कर संगठन से जुड़े ग्रामीणों को दिया गया था. अब संगठन की पकड़ ढीली हो जाने के कारण निर्धारित मात्रा में मिलने वाला अनाज भी संगठन को मिलना बंद हो गया है. बताया जाता है कि जब माओवादी संगठन के लोग जमीन जब्त कर गरीबों को खेती के लिए देते थे तो एक निर्धारित मात्रा में अनाज का हिस्सा क्रांतिकारी किसान मोर्चा कमेटी को भी देना होता था. यह अनाज भी कई इलाके से मिलना बंद हो गया है. साथ ही संगठन का कोई साथी अनाज वसूलने की स्थिति में भी नहीं है.


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