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झारखंड सरकार की उदासीनता का परिणाम है साक्षरता का शून्य परिणाम – प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक

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Sep 8, 2024

 

चौपारण(हजारीबाग) ज्ञान का दीप जहां जलता है, वहां अंधेरा कभी नहीं रहता। अक्षरों का ज्ञान, यानी पढ़ने और लिखने का ज्ञान, ये वो शक्ति है जो एक सशक्त और उन्नत समाज का निर्माण करता है। साक्षरता की ताक़त किसी भी घर, परिवार और समाज के साथ-साथ उस देश के विकास की नींव को मज़बूत करता है। इसलिए प्रतिवर्ष 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाता है। उक्त बातें आज विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर आयोजित गोष्ठी में साक्षरता कर्मियों को संबोधित करते हुए साक्षर भारत मिशन के *चौपारण प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक मुकुंद साव* ने कहा, उन्होंने कहा कि साक्षरता दिवस का उद्देश्य दुनियाभर में नव साक्षरों को उत्साहित करना है। विश्व साक्षरता दिवस हमारे लिये अहम दिवस है, क्योंकि हमारे जीवन में शिक्षा का बहुत महत्त्व है।ये दिन संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक, और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) द्वारा विश्वस्तर पर, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय, और स्थानीय स्तर पर भी मनाया जाता है। श्री साव ने कहा कि साल 1966 में यूनेस्को ने शिक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने तथा विश्व भर के लोगों का इस तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रतिवर्ष 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय/साक्षरता दिवस मनाने का निर्णय लिया था। इस दिन को मनाने का फैसला 7 नवंबर 1965 में लिया गया। यूनेस्को ने इस दिन तय किया कि साक्षरता दर को बढ़ाने के लिए दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाएगा।  वर्ष 2009-2010 को संयुक्त राष्ट्र साक्षरता दशक घोषित कर दिया गया था। तभी से लेकर आज तक सम्पूर्ण विश्व में 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाता है। आपको बता दें की इस बार 8 सितंबर 2024 को 59 वा दिवस मनाया जा रहा है,परंतु झारखंड में साक्षरता के लिए काला दिवस है,भारत सरकार ने कार्यक्रम चलाने के लिए राज्य सरकार को अपने अंश की राशि विमुक्त कर दी है परंतु झारखंड सरकार इस राशि को गड़क करने में लगी हुई है, वर्तमान में तीन साल से नव भारत साक्षरता कार्यक्रम चल रहा है जो पूरी तरह सरकारी करण कर दिया है नतीजा कि साक्षरता की कोई भी गतिविधि नही चल रही है,परिणाम शून्य है,सभी साक्षरता कर्मी जो निस्वार्थ भाव से 1996 से कार्यक्रम में मात्र शैक्षणिक सामग्री और मामूली संसाधन से सेवा देते रहे आज वो घर में बैठे है, चौपारण में 01 बीपीएम,01 कार्यालय सहायक,52 प्रेरक,3मुख्य साधन सेवी,52 मास्टर ट्रेनर,लगभग 500 स्वयंसेवक आस लगाए बैठे हैं कि कार्यक्रम आयेगा तो फिर सेवा देंगे,पर झारखंड सरकार की गलत नीतियों के कारण आज साक्षरता का रिजल्ट शून्य है,फिर भी साक्षरता कर्मियों में वही जोश और जुनून है जिससे आज भी बिना संसाधन का कार्यक्रम जीवित है,गोष्ठी में अनुसूलेखा देवी,अनीता देवी मुंद्रिका देवी,शहजादी खातून,सुनीता देवी,पुष्पा सिंह,जयमनी देवी,सावित्री देवी,चंचला देवी,रेखा देवी,प्रतिमा देवी,पुष्पा देवी,गीता देवी, आशा रंजन,मिथुन दांगी,रीता देवी,रंजित यादव,शारदा देवी,मिथुन शर्मा, कृष्णा साव,रामसेवक दांगी,सुखदेव यादव,देवेंद्र कुमार,राजेश कुमार,मैना देवी,रेखा देवी सहित कई लोग उपस्थित थे,


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