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50 से ज्यादा वकीलों को मिल चुकी है धमकी, अबतक 4 की हत्या, कईयों पर जानलेवा हमला

ByAdmin Office

Apr 1, 2023

 

रांची
पिछले कुछ वर्षो में वकीलों के साथ हुई हिंसक घटनाओं में वृद्धि हुई है. झारखंड में विगत तीन वर्षों में 100 से ज्यादा वकीलों के साथ हिंसक घटनाएं हुई हैं. जिन वकीलों के साथ हिंसा की घटना हुई हुई है, उसमें अलग-अलग जिलों के सिविल कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के साथ-साथ झारखंड हाईकोर्ट के वकील भी शामिल हैं. कुछ मामलों में तो वकीलों की हत्या भी हो चुकी है. हालांकि ज्यादातर मामलों में वकीलों के साथ हो रही हिंसक घटनाओं के पीछे निजी या जमीन का विवाद प्रमुख वजह रही है. लेकिन इन सब के बीच झारखंड के वकील एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग कर रहे हैं. ताकि उनके हितों की रक्षा हो सके.

पिछले कुछ वर्षों में जिन वकीलों की हुई हत्या

रांची में अधिवक्ता रामप्रवेश सिंह के घर में घुसकर अपराधियों ने हत्या की घटना को अंजाम दिया था. घटना के पीछे जमीन विवाद एक बड़ी वजह थी.

जमशेदपुर में अधिवक्ता प्रकाश यादव की हत्या.
रांची के वकील मनोज झा की तमाड़ में हत्या, घटना के वक्त अधिवक्ता जमीन पर बाउंड्री कार्य देखने गए थे.
चतरा के अधिवक्ता जगन्नाथ पंडित की हत्या
जिनको मिली धमकी और हुए हमले
रांची सिविल कोर्ट की अधिवक्ता पूनम कुमारी, चिरंजीवी मंडल, पवन खत्री, सरफराज अहमद, उदय कुमार, विजय प्रकाश और मनमोहन कुमार के अलावा स्टेट बार काउंसिल के सदस्य हेमंत शिकरवार पर भी हजारीबाग में हमले की प्राथमिकी दर्ज करवाई गई है. साहेबगंज के अधिवक्ता इकबाल हुसैन और देवद्रत कुमार के अलावा बोकारो की वकील ज्योति कुमारी, रंजन मिश्रा, संजय ठाकुर ने भी जान का भय बताते हुए प्राथमिकी दर्ज करवाई है. पाकुड़ के अधिवक्ता दीपक ओझा पलामू की अधिवक्ता सुष्मिता तिवारी और जमशेदपुर के अधिवक्ता गौरव पाठक को भी धमकी मिल चुकी है. जिसके बाद उक्त लोगों ने प्राथमिकी दर्ज करवाई है.

आंकड़े बताते हैं कि बीते विगत कुछ वर्षों में झारखंड के अधिवक्ता अपराधी और आम लोगों की हिंसा का शिकार हुए हैं. लेकिन इन आंकड़ों से काफी हद तक यह भी स्पष्ट हो रहा है कि कुछ मामलों को छोड़ दें तो अधिवक्ताओं के साथ होने वाली हिंसक घटनाओं के पीछे जमीन विवाद एक बड़ी वजह रही है.


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