
*बेंगलुरु :* देश का पहला थ्रीडी प्रिंटेड पोस्ट ऑफिस बेंगलुरु में खुल गया है. दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज इसका उद्घाटन किया है.
पीएम नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर पोस्ट ऑफिस की तस्वीर को शेयर किया है और इसे देश के नवाचार और प्रगति का प्रमाण बताते हुए हर भारतीय के लिए गर्व करने का मौका बताया है.
*मात्र 43 दिनों में बनकर हुआ तैयार*

केंद्रीय दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश के पहले 3 डी प्रिंटेड पोस्टऑफिस का उद्घाटन किया. इसे बेंगलुरु के कैंब्रिज लेआउट में बनाया गया है. खास बात यह है कि इसे बनाने में महज 43 दिन लगे, जबकि अनुमानित समय सीमा 45 दिन की थी. इसे एल एंड टी ने आईआईटी मद्रास की मदद से बनाया है. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बेंगलुरु भारत की नयी तस्वीर को पेश करता है. आप थ्री डी पोस्ट ऑफिस को जिस रूप में देख रहे हैं, वही भारत का भाव है. इसी भाव के साथ देश को आगे बढ़ते जाना है.

*पीएम मोदी ने कहा : हर भारतीय को गर्व होगा*
देश के पहले थ्रीडी प्रिंटेड पोस्ट ऑफिस की तस्वीर को शेयर करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने लिखा है – बेंगलुरु में भारत का पहला 3डी प्रिंटेड पोस्ट ऑफिस देखकर हर भारतीय को गर्व होगा. यह हमारे देश के नवाचार और प्रगति का एक प्रमाण है. यह आत्मनिर्भर भारत की भावना का भी प्रतीक है. उन सभी लोगों को बधाई, जिन्होंने डाकघर को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की है.
*आईआईटी मद्रास ने किया डिजाइन, लार्सन एंड टुब्रो ने 3डी से बनाया*
3डी प्रिटिंग की नयी तकनीक का इस्तेमाल कर पोस्ट ऑफिस की बिल्डिंग तैयार की गई है. बेंगलुरु के कैंब्रिज लेआउट में स्थित इस बिल्डिंग का निर्माण 21 मार्च से शुरू हुआ था और 3 मई को पूरा हो गया था. थ्रीडी तकनीक के इस्तेमाल से मात्र 43 दिनों में इस काम को पूरा कर लिया गया. इस बिल्डिंग का नाम कैंब्रिज लेआउट पोस्ट ऑफिस रखा गया है. इस 3D प्रिंटेड पोस्ट ऑफिस को आईआईटी मद्रास ने डिजाइन किया है और इसकी बिल्डिंग को लार्सन एंड टुब्रो कंस्ट्रक्शन कंपनी ने थ्रीडी तकनीक का इस्तेमाल कर बनाया है.
बेंगलुरु के 3डी प्रिंटेड पोस्ट ऑफिस की खास बातें जानिए –
बेंगलुरु के कैंब्रिज लेआउट में इस आधुनिक डाकघर को 1,021 वर्ग फुट में बनाया गया है.
*इसका निर्माण 3डी कंक्रीट प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करके किया गया है.*
इस तकनीक के तहत रोबोटिक प्रिंटर द्वारा बनी डिजाइन के अनुसार इसमें कंक्रीट की परत दर परत जमा की जाती है.
एलएंडटी का कहना है कि इसमें रोबोटिक तकनीक की मदद से पूर्व-एम्बेडेड डिजाइन को शामिल किया गया है.
इस तकनीक से निर्माण को 43 दिनों में पूरा कर लिया गया, जबकि पारंपरिक तरीके से बनाने में लगभग 6 से 8 महीने लगते हैं.
3डी प्रिंटिंग तकनीक से बने इस भवन में महज 23 लाख की लागत आयी है, जो पारंपरिक तरीके से खर्च होने वाली राशि से 30 से 40 प्रतिशत तक कम है.
इस भवन के निर्माण में मशीन, रोबोट और हर तरह की सक्षम तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. आनेवाले दिनों में इसमें
बेहतरी की गुंजाइश है.
3डी प्रिंटिंग तकनीक डेनमार्क से आयात की गई. खास प्रौद्योगिकी के जरिये कंक्रीट फुटिंग और तीन-परत वाली दीवार भी बनायी गई है. बाहरी परतों को कंक्रीट से प्रिंट किया गया है. इस भवन में कोई वर्टिकल जॉइंट नहीं है.
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