
सर्वसम्मति से बनी सहमति : राज्य सरकार विस्थापित लोगों को उनका मालिकाना हक दिलाने को लेकर भारत सरकार को करेगी अनुसंशा
अंतर्कथा : बरही/पंचम पाण्डेय

झारखंड विधानसभा निवेदन समिति के विधायकों की तीन सदस्यीय टीम मंगलवार को बरही प्रखण्ड अंतर्गत बरसोत पंचायत के विस्थापित गांव श्रीनगर उत्क्रमित मध्य विद्यालय पहुंची। टीम में निवेदन समिति के सभापति सह बरही विधायक उमाशंकर अकेला, झरिया की विधायक सह सदस्य पूर्णिमा नीरज सिंह, जुगसलाई विधायक सह सदस्य मंगल कालिंदी शामिल थे।पूरी टीम के साथ हजारीबाग उपायुक्त नैंसी सहाय, प्रशिक्षु आईएएस शताब्दी मजूमदार, डायरेक्टर स्टेट एंड लैंड एंड पुर्नवास एवं भूमि अधिग्रहण संजय कुमार, डीवीसी डायरेक्टर संजय कुमार, अपर समाहर्ता राकेश रोशन, डीएफओ पश्चिमी आरएन मिश्रा, एसडीओ पूनम कुजुर, आरके पाठक, गगनदेव बैठा कार्यपालक अभियंता विशेष प्रमंडल शामिल थे।

निवेदन समिति के सभापति व सदस्यों ने विस्थापितों के साथ की बैठक :
श्रीनगर विद्यालय भवन में निवेदन समिति के सभापति, पदाधिकारियों व सदस्यों ने विस्थापित परिवार के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। बैठक की अध्यक्षता निवेदन समिति के सभापति विधायक उमाशंकर अकेला ने किया। बैठक करीब दो घण्टो तक चला। बैठक में श्रीनगर गांव के विस्थापितों के पूरे मामलों को समझा गया। अंचल, डीवीसी, फारेस्ट विभाग के पदाधिकारियों ने जमीन से सम्बंधित सभी तथ्यों पर गम्भीरता पूर्वक चर्चा की। जिसके बाद बैठक की समाप्ति हुई।
निवेदन समिति के सभापति समेत सदस्यों व पदाधिकारियों ने सभा को किया सम्बोधित :
निवेदन समिति की बैठक के बाद विद्यालय परिसर में एक जनसभा का आयोजन किया गया। जनसभा के दौरान विस्थापित सभा के लोगों ने बारी बारी से निवेदन समिति के सभापति समेत सदस्यों व पदाधिकारियों को माला पहनाकर स्वागत किया गया। जनसभा का संचालन संतोष कुमार यादव ने किया।
बरही विधायक उमाशंकर अकेला ने कहा कि विस्थापितों की परेशानी को समझते हुए वह लगातार विधानसभा में मामले को उठाते रहे है। 2010 से लगातार वह मामले को पुरजोर तरीके से उठाते रहे है लेकिन सूबे की वर्तमान सरकार गरीबों व आम आवाम के दर्द को समझने वाली सरकार है। कहा कि बरही की जनता ने एक किसान के बेटे को विधायक बनाकर विधानसभा का सदस्य बनाने का काम किया तो उनकी समस्या का निराकरण करना भी हमारी जिम्मेदारी है। कहा कि विस्थापन नीति के अनुसार यहां के लोगों को न्याय अवश्य मिलना चाहिए। 2014 में चुनाव हारने के कारण मामला शिथिल पड़ गया था लेकिन एक बार फिर यहां की जनता ने विश्वास जताते हुए उन्हें विधायक बनाया। जिसके बाद हड़ाही और बहिमर से विस्थापित लोगों को उनका मालिकाना हक दिलाने को लेकर आज श्रीनगर गांव में बैठक हुई। उन्होंने विस्थापित लोगों से आग्रह किया कि पहले रहने के लिए जमीन लें, उसके बाद खेती को लेकर सोंचियेगा। अगर पुनः विधायक बनें तो डीवीसी में गया पूरा 1200 एकड़ जमीन दिलाने का काम करूंगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि दिसम्बर में इंटेकवेल का शिलान्यास किया जाएगा। साथ ही उन्होंने हजारीबाग सांसद पर तंज कसते हुए कहा कि मामले को संज्ञान में लेकर विस्थापित परिवार को न्याय दिलाने का काम करें। इसके अलावा उन्होंने उपायुक्त से आग्रह किया कि रानीचुंवा पंचायत में डीएमएफटी मद से धोबघट गांव का सड़क बनाने को लेकर योजनाबद्ध तरीके से सड़क बनाने की जरूरत है तांकि वहां के लोगों को सभी सरकारी सुविधाएं उनतक पहुंचे।
झरिया विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह ने कहा कि विस्थापितों के दर्द को बहुत नजदीक से देखी हूँ और भलीभांति समझती हूं। कहा कि झरिया से चलकर बरही के श्रीनगर पहुंची हूँ इस लड़ाई को लड़ने में उनकी जहां भी जरूरत हों, वह उनके साथ सदैव खड़ी रहेंगी।
जुगसलाई विधायक सह सदस्य मंगल कालिंदी ने बरही विधायक की प्रशंसा करते हुए कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान यहां की ज्वलंत मुद्दों को लेकर हमेशा से मुखर रहे है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक रूप से विस्थापितों को न्याय दिलाने को लेकर पहल की जाएगी। कहा कि सूबे की हेमंत सोरेन की सरकार गांव से लेकर शहर के विकास को लेकर प्रतिबद्ध है। सरकार गांव गांव जाकर अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास योजनाओं से लाभान्वित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सरकार गरीबों की सरकार है।
उपायुक्त नैंसी सहाय ने विस्थापित लोगों को कहा कि भारत सरकार और सम्बंधित विभाग को राज्य सरकार अनापत्ति पत्र दिलाने को लेकर अनुसंशा कर भेजा जाएगा। उन्होंने बरही विधायक उमाशंकर अकेला समेत पूरी समिति की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह सकारात्मक पहल है, जल्द ही मामले को निष्पादित किया जाएगा।
अपर समाहर्ता राकेश रौशन ने कहा कि मामले को लेकर राज्य सरकार भारत सरकार को विस्थापितों को उनका मालिकाना हक दिलाने को लेकर अनुसंशा करके भेजने का काम करेगी।
डीएफओ आरएन मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए बरही विधायक के प्रयास की सराहना करते हुए पूर्ण रूप से सहयोग करने की बात कही।
ज्ञात हो कि 1952 में डीवीसी द्वारा विस्थापित परिवारों को डीवीसी ने दूसरे स्थान पर बसाने की कोशिश की लेकिन उनके मन के स्वरूप जमीन नहीं दिया गया था। जिसके कारण पूर्व राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के आदेश पर चौपारण प्रखंड के हडाही ग्राम से विस्थापित परिवारों को श्रीनगर ग्राम में बसाया गया। श्रीनगर में जिस जमीन पर ग्रामीण बसे, वह वन विभाग की जमीन है। 1957 से आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने इनकी समस्याओं और डीवीसी से विस्थापित परिवारों की जमीनों की सरकारी रसीद कटवाने और उन्हें जमीन का मालिकाना हक दिलाने के लिए कोशिश नहीं किया गया। जिसके फलस्वरूप 56 मौजा जो डीवीसी द्वारा विस्थापित किए गए। उनकी जमीन की रसीदें आज तक नहीं कट रही थी। विधायक उमाशंकर अकेला ने 2009 के विधानसभा चुनाव के बाद इस मामले को विधानसभा में लगातार उठाते रहे, उसके बाद वह निवेदन समिति के सभापति के रूप में विस्थापित परिवारों की समस्याओं को सरकार के सामने रखने का काम किया। इसी फल स्वरुप डीवीसी द्वारा जिन किसानों को जमीन का पट्टा दिया गया था उनकी रसीद कटनी चालू हो गयी है लेकिन श्रीनगर ग्राम के लोग वन विभाग की जमीन पर बसे हैं। इन्हें वन विभाग से पट्टा दिलाने की आवश्यकता है। वन विभाग की पट्टा दिलाने को लेकर बैठक श्रीनगर उत्क्रमित मध्य विद्यालय में की गई, जो आजादी के बाद पहली बार निवेदन समिति झारखंड विधानसभा की यह बैठक है। जिसमें ग्रामीण सैकड़ो की संख्या में उपस्थित हुए।
बैठक को सफल बनाने में शामिल रहे पदाधिकारी :
बैठक को सफल बनाने में सीओ अरविंद देवाशीष टोप्पो, बीडीओ क्रिस्टीना रिचा इंदवार, रेंजर कमलेश सिंह, एसडीपीओ नाजिर अख्तर, पुनि सह थाना प्रभारी ललित कुमार, बिजली एसडीओ सौरभ लिंडा, फोरेस्टर दीपक कुमार मुस्तैद नजर आए।
बैठक में यह थे शामिल :
जीप उपाध्यक्ष किशुन यादव, प्रमुख मनोज रजक, उपप्रमुख देवलाल कुशवाहा, मुखिया मोतीलाल चौधरी, कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष डॉ निजामुद्दीन अंसारी, कांग्रेस प्रखण्ड अध्यक्ष अब्दुल मनान वारसी, विस विधायक प्रतिनिधि छट्ठू गोप, प्रखण्ड विधायक प्रतिनिधि सुनील साहू, सिकंदर राणा, दीपक गुप्ता, परमेश्वर यादव, रघुवीर यादव, गाजो यादव, राजेन्द्र यादव, राकेश रजक, इमरान, मनोज मंडल, छोटी राम, उपमुखिया रीता देवी सहित कई लोग मौजूद थे।
विस्थापित लोग थे शामिल :
श्रीनगर विस्थापित ग्राम के अध्यक्ष सुरेंद्र यादव, उपाध्यक्ष सुखदेव यादव, सचिव इंद्रदेव यादव, कोषाध्यक्ष विजय गुप्ता, कृष्णमोहन यादव, बासुदेव यादव, अभिमन्यु यादव, कृष्णा यादव, गोपी यादव, अनिल यादव, मनोज यादव, सिकंदर यादव, रामप्रसाद यादव, तुलसी ठाकुर, रहमत अली, महेंद्र ठाकुर, रमजान मियां, सुनील यादव, परमेश्वर यादव, महादेव महतो, धनोखी यादव, सुकर भुइयां, सहदेव रविदास, किशुन रविदास, विजय गुप्ता सहित सैकड़ो विस्थापित महिलाएं व पुरुष शामिल थे।
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