
सरायकेला : चांडिल बहुउद्देशीय स्वर्णरेखा परियोजना से प्रभावित 116 गांवों के विस्थापित परिवारों की वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान के लिए बुधवार को साकची स्थित परिसदन भवन में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता झारखंड मानवाधिकार आयोग की विशेष प्रतिवेदक श्रीमती सुचित्रा सिन्हा, भा.प्र.से. सेवानिवृत्त ने की।
बैठक में स्वर्णरेखा परियोजना आदित्यपुर के प्रशासक, अपर निदेशक भू-अर्जन एवं पुनर्वास आदित्यपुर, विशेष भू-अर्जन एवं पुनर्वास विभाग, पुनर्वास पदाधिकारी संख्या-2 चांडिल, कार्यपालक अभियंता शिविर एवं केंद्रीय भंडार चांडिल, मुख्य अभियंता कार्यालय, खनन पदाधिकारी सरायकेला-खरसावां, जिला एवं अनुमंडल प्रशासन के वरिष्ठ पदाधिकारी सहित चांडिल बांध विस्थापित संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

*116 गांवों की समस्याएं रखी गईं विस्तार से*

बैठक में विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने विस्थापितों की ओर से विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने पुनर्वास स्थलों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव, लंबित मुआवजा भुगतान, विकास पुस्तिका में गड़बड़ी, प्लॉट आवंटन में देरी, भूमि का पट्टा और म्यूटेशन, सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलना, स्वरोजगार के अवसर तथा खनन में स्थानीय विस्थापितों की भागीदारी जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए।
राकेश रंजन महतो ने कहा कि परियोजना को 40 साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज भी हजारों विस्थापित परिवार बुनियादी सुविधाओं और कानूनी अधिकारों से वंचित हैं।
*अधिकारियों ने दिया समयबद्ध समाधान का आश्वासन*
बैठक में यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि चांडिल बांध विस्थापितों की अनेक समस्याएं वर्षों से लंबित हैं। इस पर अधिकारियों ने कहा कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाएगा।
पुनर्वास स्थलों में सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी आधारभूत सुविधाओं को प्राथमिकता से पूरा करने, मुआवजा के लंबित भुगतान जारी करने और पात्र विस्थापितों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर सहमति बनी। साथ ही प्लॉट आवंटन और भूमि संबंधी विवादों के निपटारे के लिए विशेष शिविर लगाने का निर्णय लिया गया।
*मानवाधिकार आयोग ने दिया सख्त निर्देश*
अध्यक्षता कर रही विशेष प्रतिवेदक श्रीमती सुचित्रा सिन्हा ने कहा कि पुनर्वास केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहना चाहिए। “विस्थापित परिवारों को सम्मानजनक जीवन, भूमि का अधिकार, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य और सभी सरकारी सुविधाओं तक समान पहुंच मिलनी चाहिए। सभी विभाग संवेदनशीलता के साथ काम करें और मामलों का विधिसम्मत एवं समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करें।”
उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी लाने और प्राथमिकता के आधार पर लंबित मामलों की समीक्षा करने का निर्देश दिया।
*विस्थापित संगठनों ने जताया आभार*
विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन ने बैठक आयोजित करने और समस्याओं को गंभीरता से सुनने के लिए झारखंड मानवाधिकार आयोग एवं सभी उपस्थित पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया। संगठन ने उम्मीद जताई कि बैठक में हुए निर्णय धरातल पर जल्द दिखेंगे और विस्थापितों को उनका हक और न्याय मिल सकेगा।
सभी विभागों को 30 दिनों के भीतर लंबित मामलों की सूची बनाकर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने और पुनर्वास स्थलों में विकास कार्यों को युद्धस्तर पर शुरू करने का निर्देश दिया गया।
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