
वाराणसी : काशी के कण-कण में भगवान शंकर बसे हुए हैं। यहां का काशी विश्वनाथ मंदिर तो विश्वप्रसिद्ध है ही लेकिन यहां एक ऐसा शिवलिंग है जो हर महाशिवरात्रि पर जौ के बराबर बढ़ जाता है। सावन में ईश्वरगंगी स्थित जागेश्वर महादेव के दर्शन, पूजन और रुद्राभिषेक का खास महत्व है। मान्यता है कि भगवान शिव यहां माता पार्वती के साथ विराजते हैं। कहा जाता है कि तीन वर्ष 33 दिन लगातार जागेश्वर महादेव का दर्शन करने वाले को योग की प्राप्ति हो जाती है। सभी सद् कामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। कन्या द्वारा 41 दिन लगातार दर्शन करने से विवाह में आने वाली बाधा नष्ट हो जाती है।

बाबा की नगरी में यह एक ऐसा शिवलिंग है जो हर महाशिवरात्रि पर जौ के बराबर बढ़ जाता है। महंत स्वामी मधुर कृष्ण ने बताया कि स्कंद पुराण काशी खंड के अनुसार भगवान शंकर जब काशी से मदरांचल को जाने लगे तो जैगीष ऋ षि ने उनसे अनुरोध किया कि आप न जाएं।

शिव के जाते ही जैगीष ऋ षि पाताल स्थित गुफा में तपस्या करने चले गए। शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए तो उन्होंने नंदी को काशी चलने को कहा। काशी आकर शिव ने नंदी को लीला रूपी एक कमल दिया।
नंदी ने गुफा में जाकर तपस्यारत ऋषि को कमल का स्पर्श कराया। उनकी चेतना लौटी। वह जैसे ही गुफा द्वार से बाहर आए शिव ने उन्हें सपरिवार दर्शन दिया।
वरदान भी दिया कि विराट लिंगरूप में वह यहां सदैव निवास करेंगे और प्रत्येक महाशिवरात्रि की निशा में इस लिंग में एक जौ के बराबर वृद्धि होगी।
इस शिवलिंग पर चक्र, शंख, सांप, बिच्छू आदि के चिह्न भी हैं। महंत का कहना है कि एक बार गुफा की खोदाई की गई तो इतने विषधर निकलने लगे कि इसे बंद करना पड़ा।
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