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साहेबगंज गंगा नदी में महादेवगंज के पास मिली साउथ अफ्रीका में पाई जाने वाली विदेशी कटिली मछली।

ByAdmin Office

Mar 2, 2024

 

अंतर्कथा प्रतिनिधि

 

 

साहेबगंज (अमर कुमार)-: साहेबगंज के गंगा नदी में महादेवगंज के गोरीटोला छुटकी नदी में एक अलग रंग और शरीर में काटों से भरी मछली मछुआरों के जाल में फस गई जिसे देखकर मौजूद मछुआरों में हड़कंप मच गई। वहीं मछुआरों ने जब 70 और 80 वर्ष के बुजुर्गो को मछली दिखाया तो उनलोगो ने भी कहा कि ऐसी मछली अपने जीवन में कभी नही देखी। मौजूद ग्रामीणों और मछुआरों ने इसकी सूचना गंगा के प्रहरी को दिया। गंगा प्रहरी ने जब डीएफओ को इसकी जानकारी दी तो डीएफओ मनीष तिवारी ने उसे जीवित अवस्था में लाने को कहा और फिर मछली को देखकर इसकी फोटो और वीडियो वैज्ञानिकों के पास भेजा।डीएफओ मनीष तिवारी ने बताया कि ये मछली देसी नही बल्कि विदेशी है ,ऐसी मछलियां साउथ अफ्रीका या फिर अमेरिका में पाई जाती है और इसे सकर माउथ केटफिश के नाम से जाना जाता है। यह मछली यहां के गंगा के इको सिस्टम को भी खराब कर सकती है और ऐसी मछली गंगा में रहने वाली अन्य प्रजाति कि सभी देशी छोटी मछलियों को खा जाती है जिससे मछलियों कि अस्तित्व पर भारी संकट है। साथ ही यहां के मछुआरों कि आजीविका पर भी एक खतरा है। ये मछली छोटी जरूर है लेकिन पूरी तरह से कटिली होती है जिससे जब देशी मछलियों कि सभी छोटी मछलियों को खा लेने के बाद गंगा में रहने वाली डॉल्फिन और अन्य जलीय जीव जंतुओं को भी ये काफी नुकसान पहुंचा सकती है।ये खाने वाली मछली नही है। ये यहां के पानी में नही पाया जाता और यहां के गंगा के ऑक्सीजन और इको सिस्टम को बर्बाद करने का कारण बन सकती है। डीएफओ मनीष तिवारी ने आगे बताया कि हम अपने गंगा प्रहरी और मछुआरों को जागरूक कर रहे हैं कि इस तरह कि मछली को जब भी देखा जाए तो इसकी खबर तुरंत करे क्योंकि ये मछली तेजी से फैलती है जो अन्य सभी मछलियों और जलीय जीव जंतुओं कि अस्तित्व के मछुआरों कि रोजी रोजगार के लिए भी खतरा है। एक्सपर्ट के अनुसार यह मछली भारत से हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका कि अमेजन नदी में पाई जाती है ,भारत में इन मछलियों का मिलना ठीक नही है इसका घर भारत कि नदियां नही है। इसका रंग अलग अलग तरह का होता है साथ ही इसके शरीर पर एरोप्लेन के तरह का पंख दिखता है। हाल में यह मछली बिहार के गोपालगंज के गंडक नदी में पाई गई थी। एमपी और यूपी के गंगा नदी में भी यह मछली पाई जाने से चिंता बढ़ गई है क्योंकि ये मछली पूरी तरह से मांसाहारी होती है और हर कोई सोच में पड़ गया है कि ये मछली यहां आई कैसे। इस मछली का मिलना नदी के इकोसिस्टम के लिए भी चिंताजनक है।


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