
आज दिनांक 12 दिसंबर को अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय झारखंड एवं उपायुक्त हजारीबाग नैंसी सहाय के निदेशानुसार जन्म-मृत्यु निबंधन प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का सूचना भवन, हजारीबाग में ज़िला सांख्यिकी पदाधिकारी, हजारीबाग एवं प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, बरही, चौपारण, बरकट्ठा, चालकुशा, विष्णुगढ़, टाटीझरिया, चूरचू, एवं पदमा के द्वारा सामुहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला मे प्रखंडों के प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, सीएचसी,पीएचसी के प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी, पंचायत सचिव, बीएसएस (वीएलडब्लू),एएसओ के अलावा जन्म-मृत्यु से जुड़े सभी कर्मी एवं सभी संबंधित कार्यालय के कंप्युटर ऑपरेटर भी भाग लिए।
प्रशिक्षण जेवियर मिंज, ज़िला सांख्यिकी पदाधिकारी, हजारीबाग, प्रमोद कुमार सिन्हा आमंत्रित प्रशिक्षक, एवं अमरनाथ गुप्ता, कंपूटर ऑपरेटर के द्वारा दिया गया. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य रूप से जन्म- मृत्यु निबंधन की प्रक्रिया को पीपीटी के माध्यम से आसानी से समझाया गया। साथ ही सीआरएस पोर्टल/ सॉफ्टवेयर में लाइव डेमो के साथ पंजीकरण कर बताया गया। प्रशिक्षण के दौरान वाइटल से संबंधित बुकलेट एवं प्रशिक्षण सामग्री का भी वितरण किया गया। कार्यक्रम को मुख्य रूप से दो सत्र में प्रशिक्षण दिया गया- आरबीटी एक्ट 1969/ झारखंड- 2009 की जानकारी, पीपीटी प्रेजेन्टेशन/सीआरएस पोर्टल एवं चर्चा/ प्रश्नोत्तरी के रूप में किया गया। इस दौरान प्रपत्रों के भरने, जन्म मृत्यु निबंधन का इतिहास पर प्रकाश डाला गया। मौके पर एमसीसीडी सर्टिफिकेट प्राइवेट हॉस्पिटल को रिपोर्टिंग यूनिट बनाने, फर्जी प्रमाण पत्र को रोकने, जन्म मृत्यु के आंकड़ो का नीति निर्माण में उपयोग रजिस्ट्रेशन यूनिट का निरीक्षण प्रतिवेदन, हजारीबाग जिला का जन्म मृत्यु का स्टैटिकल डाटा प्रस्तुत करते हुए निबंधन प्रतिशत को बढ़ाने के लिए अपील किया गया। प्रशिक्षण के क्रम में कई पंचायत सचिव एवं बीएसएस के द्वारा क्षेत्र स्तर पर आ रहीं चुनौतियों एवं परेशानियों को को ठीक करने के उपायों के बारे में चर्चा की गई।
आरबीडी ऐक्ट की जानकारी,सूचकों की सूची,समय सीमा के चारों स्तर, निबंधन क्षेत्र, निबन्धक के कर्तव्य, जन्म -मृत्यु प्रमाणपत्र का महत्व, डीएलसीसी बैठक, राज्य स्तरीय रजिस्ट्रार, विलंबित शुल्क एवं हेड सहित तमाम जानकारी प्रतिभागियों को दिया गया एवं 100 % निबंधन कराने का अपील किया गया. इसके अतिरिक्त सभी बीडीओ से प्रत्येक 3 माह में बीएलसीसी की बैठक कर कार्यवाही जिला आपूर्ती कार्यालय में भेजने हेतु अनुरोध किया गया एवं आमजनों को जागरूक करने का अपील भी किया गया।
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