
सरायकेला ,: चांडिल बांध विस्थापितों के लिए RL-180 से RL-183 तक के पुनर्वास हेतु विभाग द्वारा दी गई लगभग *₹13 करोड़* की राशि से हुए अनुदान भुगतान में कथित अनियमितताओं और विकास पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ की जांच को लेकर विस्थापितों में गंभीर चिंता है। जल संसाधन विभाग, रांची के संयुक्त सचिव के नेतृत्व में जांच चल रही है।
*मृत व्यक्ति के नाम पर विकास पुस्तिका का गंभीर आरोप*

विस्थापितों के बीच सबसे गंभीर चर्चा नीमडीह प्रखंड के हेवेन गांव को लेकर है। आरोप है कि गांव के एक व्यक्ति की मृत्यु वर्ष 2002 में हो गई थी, जबकि उनकी भूमि का अधिग्रहण 2003 में हुआ। आरोप है कि मृत्यु के बाद उसी व्यक्ति के नाम से विकास पुस्तिका तैयार की गई और 2026 में अनुदान राशि का भुगतान भी कर दिया गया।

विस्थापितों का कहना है कि यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि पूरी पुनर्वास प्रणाली पर सवाल खड़ा करेगा। जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
*जांच कमेटी द्वारा विस्थापित प्रतिनिधियों से नहीं मिलना चिंता का विषय*
विस्थापित संगठनों का आरोप है कि वे जांच में सहयोग करना चाहते हैं, दस्तावेज देना चाहते हैं, लेकिन जांच कमेटी द्वारा मिलने से इनकार किया जा रहा है।
संगठनों ने कहा – “हम जांच में हस्तक्षेप नहीं, सहयोग करना चाहते हैं। 44 साल से रिकॉर्ड के साथ संघर्ष कर रहे विस्थापितों के पास ऐसे तथ्य हैं जो जांच की दिशा तय कर सकते हैं।”
*44 वर्षों से संघर्ष*
चांडिल बांध बहुउद्देशीय परियोजना के विस्थापित पिछले 44 वर्षों से पुनर्वास के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विस्थापितों का आरोप है कि दलाल प्रवृत्ति और भ्रष्ट तंत्र के कारण वास्तविक पात्र परिवारों को आज भी समय पर अनुदान और विकास पुस्तिका नहीं मिल रही है। कुछ लोगों की अनियमितता की सजा पूरे विस्थापित समाज को नहीं मिलनी चाहिए।
*मूल के बजाय विभाजित विकास पुस्तिका से भुगतान पर सवाल*
एक और बड़ा सवाल – मूल विकास पुस्तिका रहते हुए विभाजित विकास पुस्तिका से भुगतान क्यों?
विशेषकर पुनर्वास कार्यालय संख्या-2 द्वारा मूल धारकों के बजाय विभाजित पुस्तिकाओं पर भुगतान में दिखाई जा रही कथित जल्दबाजी पर विस्थापित सवाल उठा रहे हैं। यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस नियम और किस आदेश पर यह प्रक्रिया अपनाई गई।
*विस्थापितों की मांग – जांच केवल भुगतान तक सीमित न रहे*
विस्थापितों का कहना है कि जांच केवल वित्तीय भुगतान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बल्कि –
– मूल विकास पुस्तिका
– विभाजित विकास पुस्तिका
– भूमि अधिग्रहण रिकॉर्ड
– पात्रता और लाभार्थी की पहचान
– भुगतान प्रक्रिया
इन सबका आपस में मिलान कर देखा जाए।
विस्थापित संगठनों ने मांग की है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित हो। जांच कमेटी विस्थापित प्रतिनिधियों से संवाद करे, उनके दस्तावेजों को जांच का हिस्सा बनाए और यदि गड़बड़ी साबित होती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो, लेकिन पात्र विस्थापितों के अधिकार प्रभावित न हों।
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