
सरायकेला : चांडिल डैम विस्थापितों का आरोप – तालाब में स्नान, रास्ते से आने-जाने और मवेशी चराने से रोका जा रहा है, पत्थर मारकर भगाने का आरोप, पुलिस और पुनर्वास विभाग को सौंपा आवेदन ।
चांडिल डैम प्रभावित विस्थापितों के पुनर्वास स्थल काटिया में अधिकारों पर रोक का गंभीर मामला सामने आया है। आज स्थल का दौरा करने पर जो स्थिति दिखी वह चिंताजनक है।

क्या है आरोप ?*

चांडिल प्रखंड के रूदिया पंचायत अंतर्गत काटिया पुनर्वास स्थल के विस्थापितों का आरोप है कि उन्हें तालाब में स्नान करने, मैदान में शौच करने, सार्वजनिक रास्ते से आने-जाने तथा गाय-बकरी चराने जैसी दैनिक गतिविधियों से रोका जा रहा है। आरोप है कि क्षेत्र की शांति और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।
विस्थापितों के अनुसार काटिया टोला गोड़डीह निवासी मोहन गौड़, शिव चरण सिंह, बैलून सिंह, बृहस्पति सिंह, रवि सिंह तथा दो अन्य लोगों* द्वारा उन्हें धमकाया गया और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग से रोका गया। आरोप है कि उन लोगों ने कहा कि – “सरकार ने विस्थापितों को 12.5 डिसमिल जमीन दी है, उसी के भीतर रहो।”
*पत्थर मारकर भगाने और महिलाओं को स्नान से रोकने का आरोप*
पुनर्वास निवासी जगन्नाथ किस्कू ने आरोप लगाया कि शौच के लिए जाते समय उन्हें पत्थर मारकर भगाया गया। वहीं पूनम देवी ने आरोप लगाया कि वह अपने बच्चों के साथ तालाब में स्नान करने गई थीं, तो उन्हें स्नान करने से रोक दिया गया।
विस्थापितों का कहना है कि यदि जमीन की सीमा या सार्वजनिक स्थान के उपयोग को लेकर विवाद है तो उसका समाधान प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष सीमांकन और जांच से होना चाहिए, किसी को कानून हाथ में लेकर शांति भंग करने का अधिकार नहीं है।
*पुलिस और पुनर्वास विभाग को आवेदन*
घटना से चिंतित विस्थापितों ने आज चांडिल थाना प्रभारी और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को लिखित आवेदन सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की। साथ ही पुनर्वास कार्यालय संख्या-2 से स्थल का सीमांकन कराने और अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की। आवेदन की प्रतिलिपि कार्यपालक अभियंता, केंद्रीय भंडार एवं शिविर प्रमंडल, चांडिल बाँध अंचल तथा अधीक्षण अभियंता को भी दी गई है।
*3 दिन का अल्टीमेटम*
विस्थापितों ने प्रशासन को तीन दिनों का समय दिया है और मांग की है कि तत्काल स्थल निरीक्षण, सीमांकन और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अगर इस अवधि में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपने अधिकारों और सुरक्षा की मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
इस अवसर पर जगन्नाथ किस्कू, पूनम देवी, बिरबल प्रमाणिक, राकेश रंजन महतो, श्यामल मार्डी, नारायण गोप, अंबिका यादव, शोभा रानी, सुनीता महाली सहित सैकड़ों महिला-पुरुष उपस्थित थे।
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