
रिपोर्ट: वीरेंद्र बर्मन
झरिया : लोकतंत्र सेनानी संघ की ओर से रविवार को भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी की 124वीं जयंती और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक व भारत रत्न नानाजी देशमुख की 110वीं जयंती अत्यंत धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर कतरास मोड़, झरिया स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यकर्ताओं ने देश में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करने का संकल्प लिया।समारोह के दौरान वक्ताओं ने दोनों महापुरुषों के जीवन और उनके अद्यम साहस को याद किया। यह एक अनोखा संयोग है कि दोनों विभूतियों की जयंती एक ही दिन है। इस दौरान पटना में छात्र आंदोलन के समय के एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक प्रसंग को साझा किया गया। बताया गया कि आंदोलन के दौरान जब तत्कालीन डीएम विजय शंकर दुबे ने जयप्रकाश नारायण के सिर पर लाठी से प्रहार करना चाहा, तो नानाजी देशमुख ने अपनी कलाई आगे कर उस प्रहार को अपने ऊपर रोक लिया था, जिससे उनका हाथ टूट गया था।

आपातकाल के प्रताड़ितों ने साझा किया दर्द…

समारोह में आपातकाल के काले दिनों को याद करते हुए मीसा और डीआईआर के तहत जेल में प्रताड़ना झेलने वाले लोकतंत्र सेनानियों—अधिवक्ता हरीश कुमार जोशी, सुखलाल पंसारी और गंगाशरण शर्मा ने तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के तानाशाही रवैये और श्रमिकों-नागरिकों पर किए गए अत्याचारों का विस्तार से वर्णन किया। कार्यक्रम में राजकुमार अग्रवाल, उचित महतो, अशोक बरनवाल, मुन्ना पांडे और आशीष कुमार सहित कई गणमान्य लोग विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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