

रजरप्पा छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर में हाल ही में हुई बुलडोजर कार्रवाई ने सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर गहरा असर डाला है। करीब 254 दुकानों के टूटने से वर्षों की मेहनत, सपने और रोज़गार एक पल में मलबे में बदल गए। जहां पहले श्रद्धालुओं की भीड़ और दुकानों की रौनक रहती थी, आज वहां सन्नाटा और टूटे ढांचे नजर आ रहे हैं।

इस कार्रवाई का असर सिर्फ दुकानदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। परिसर में मलबा फैला होने के कारण चलना मुश्किल हो गया है। न छांव की व्यवस्था है, न बैठने की जगह और न ही पीने के पानी की सुविधा। तेज गर्मी में श्रद्धालु पानी और आराम के लिए भटकते दिख रहे हैं, जिससे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर यहां भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। ऐसे में मौजूदा हालात और चिंता बढ़ा रहे हैं। प्रशासन से मांग है कि जल्द मलबा हटाया जाए, पानी, छांव और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, साथ ही प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की जाए।
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