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मानहानि मामले में राहुल गांधी को हाईकोर्ट से राहत नहीं, याचिका पर आदेश सुरक्षित

ByAdmin Office

May 3, 2023

 

अहमदाबाद : गुजरात उच्च न्यायालय ने 2019 के ‘मोदी सरनेम’ मानहानि मामले में दोषसिद्धि पर रोक लगाने की कांग्रेस नेता राहुल गांधी की याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा। अवकाश के बाद जस्टिस हेमंत प्रच्छक फैसला सुनाएंगे।

कोर्ट ने तब तक के लिए राहुल गांधी को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मानहानि मामले में सुनाई गई 2 साल की सजा की अपील पर उच्‍च न्‍यायालय में दोनों पक्ष की बहस मंगलवार को पूरी हो गई।

न्‍यायाधीश हेमंत प्राच्‍छक ने राहुल को अभी किसी भी तरह की राहत से इनकार करते हुए निर्णय सुरक्षित रखा है। राहुल के बचाव में वकील ने कहा सत्र न्‍यायालय ने कानूनी तथ्‍यों को भी देखने की कोशिश नहीं की।

मानहानि मामले के शिकायतकर्ता पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी के वकील निरुपम नानावटी ने हाईकोर्ट में कहा कि राहुल गांधी लोकसभा की सदस्‍यता चले जाने से अधीर हैं। राहुल की सदस्‍यता हाईकोर्ट के निर्देश पर नहीं गई है और ना ही निचली अदालत ने उनको अयोग्‍य घोषित किया।

किसी भी कोर्ट से 2 साल अथवा अधिक की सजा होने पर सदन की सदस्‍यता के अयोग्‍य होने का कानून संसद की ओर से ही बनाया गया था।

नानावटी ने यह भी कहा कि खुद राहुल गांधी 2013 में इस अधिनियम के समर्थन में थे। हाईकोर्ट में मानहानि मामले में दोनों पक्ष की बहस पूरी हो गई, न्‍यायाधीश हेमंत प्राच्‍छक ने निर्णय सुरक्षित रखा है, निचली अदालत के निर्णय का भी हाईकोर्ट अध्‍ययन करेगी। ग्रीष्‍म अवकाश के बाद इस पर फैसला आ सकता है।

उधर राहुल गांधी के वकील वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ट्रायल कोर्ट की बात छोड दें तो भी सत्र अदालत ने तथ्‍यों को देखने व घटनाक्रम को समझने की कोशिश ही नहीं की। ढाई साल बाद अचानक शिकायतकर्ता कोर्ट पहुंचते हैं और एक खुली सीडी अदालत को बतौर सबूत थमा देते हैं। सिंघवी ने दोहराया कि इस केस में सबूतों व तथ्‍यों पर गौर ही नहीं किया गया, सत्र अदालत ने निचली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा लेकिन सबूत व गवाहों को देखने की कोशिश ही नहीं की।

सिंघवी ने अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राहुल ने जनसभा में नाम लेकर आरोप लगाये थे जिससे शिकायतकर्ता का कोई वास्‍ता नहीं था। सिंघवी ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता का उपनाम मोदी मूल सरनेम नहीं है।

देश में मोदी समुदाय के 13 करोड लोग होने की बात तथ्‍यात्‍मक रूप से गलत है। जिनका नाम लिया उनमें से एक ने भी शिकायत नहीं की।

गौरतलब है कि राहुल गांधी ने 13 अप्रेल 2019 को कर्नाटक बेंगलुरु से 100 किमी दूर कोलार में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि सभी चोर मोदी क्‍यूं हैं, और कितने मोदी निकलेंगे। उनके इस बयान को लेकर गुजरात के पूर्व मंत्री एवं सूरत से भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने 15 अप्रेल 2019 को अडाजण पुलिस थाने में आपराधिक मानहानि की एक शिकायत दर्ज कराई थी।

सूरत के मुख्‍य न्‍यायिक दंडाधिकारी हरीश हसमुख वर्मा ने 23 मार्च को भारतीय दंड संहिता की धारा 499 व 500 के तहत राहुल को 2 साल की सजा सुनाई थी। इस निर्णय को राहुल की ओर से सत्र अदालत में चुनौती देते हुए राहुल की ओर से दोषसिद्धि पर रोक की मांग की गई थी, जो 20 अप्रैल को खारिज कर दी गई थी।


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