

*मथुरा के फर्जी परीक्षार्थियों ने 2015 में देवास के प्रेस्टीज कालेज में दी थी परीक्षा 10 हजार रुपये लेकर केंद्र में बैठा था दूसरे के स्थान पर*
देवास। वनरक्षक भर्ती के लिए 2015 में हुई व्यापमं की परीक्षा में फर्जी तरीके से परीक्षा देने के मामले में दो दोषियों को न्यायालय ने चार-चार वर्ष की सजा सुनाई है दोनों पर तीन-तीन हजार रुपये का अर्थदंड भी किया गया है। फर्जी परीक्षार्थी भोपाल में पकड़ा गया था, जिसने पूछताछ के बाद देवास के प्रेस्टीज कालेज में भी ऐसा ही कांड होने की जानकारी दी थी।

जिला अभियोजन अधिकारी (डीपीओ) राजेंद्रसिंह भदौरिया ने बताया कि 16 अगस्त 2015 को व्यावसायिक परीक्षा मंडल भोपाल द्वारा आयोजित वनरक्षक भर्ती परीक्षा-2015 के केंद्र एलएनसीटी भोपाल में परीक्षार्थी दीपक कुमार के स्थान पर विकास कुमार परीक्षा दे रहा है, जब उससे रिकार्ड आफ आंसर शीट एंड अटेंडेंस पर हस्ताक्षर करवाए गए तो इसका मिलान नहीं हुआ।

पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह दीपक कुमार के स्थान पर आया था इस संबंध में एलएनसीटी भोपाल के अधीक्षक ने पुलिस को सूचना देकर आरोपित विकास के खिलाफ केस दर्ज करवाया। पुलिस पूछताछ में विकास ने बताया कि आरोपित अखिलेश ने दीपक के स्थान पर परीक्षा देने के लिए 10 हजार रुपये दिए थे।
भोपाल पुलिस की पूछताछ में अखिलेश ने बताया कि उसने वनरक्षक भर्ती परीक्षा-2015 के देवास स्थित परीक्षा केंद्र प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट में टीटू बघेल के स्थान पर परीक्षा देने के लिए अन्य युवक अमित को 10 हजार रुपये दिए थे। इसके बाद पुलिस ने अमित को भी पकड़ लिया।
उसके पास से टीटू बघेल की परीक्षा का एडमिट कार्ड जब्त किया है। देवास का मामला होने के कारण भोपाल पुलिस ने असल अपराध कायमी के लिए मामला देवास के औद्योगिक क्षेत्र थाने को भेज दिया। यहां पुलिस पूछताछ में पता चला कि परीक्षा देने के लिए रवि उर्फ रवींद्रपाल ने इस काम के लिए एक-एक लाख रुपये देने की बात कही थी।
देवास पुलिस ने रवि उर्फ रवींद्रपाल और टीटू बघेल के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर विवेचना की और चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया। प्रकरण में सुनवाई के बाद प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने निर्णय पारित कर टीटू बघेल निवासी चाहा कठौती कुआं, न्यू कोतवाली मथुरा व रवि उर्फ रविंद्रपालसिंह बघेल निवासी ग्राम सूरज पोस्ट राया जिला मथुरा को धारा 467 सहपठित धारा 120बी में चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास व तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। प्रकरण में शासन की ओर से अभियोजन का संचालन अपर लोक अभियोजक मनोज कुमार निगम ने किया।
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