
लम्बी पूछ में के बाद मंत्री आलमगीर आलम को जेल भेज दिया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने कोर्ट में बताया है कि अब तक की जांच के दौरान मंत्री आलमगीर आलम के खिलाफ मनी लांड्रिंग में संलिप्तता के कई सारे साक्ष्य मिले कि। टेंडर कमीशन घोटाले में गुरुवार को झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने 14 दिनों की लंबी पूछताछ के बाद बिरसा जेल भेज दिया।

मनी लांड्रिंग में संलिप्तता के मिले साक्ष्य

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने कोर्ट में बताया है कि अब तक की जांच के दौरान मंत्री आलमगीर आलम के खिलाफ Money Laundering में संलिप्तता के कई सारे साक्ष्य मिले हैं।
मनी लाउंड्रिंग के जरिए जुटाई गई संपत्ति को अपने और अपने सहयोगियों के पास भी उन्होंने रखा।
इसके साथ ही इस अर्जित अवैध कमाई का निवेश भी मेन स्ट्रीम अर्थव्यवस्था में किया गया।
प्रवर्तन निदेशालय टीम ने अदालत को यह भी बताया है कि बाहर रहने की स्थिति में वह केस को प्रभावित कर सकते हैं, ऐसे में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाए।
ED ने कोर्ट को बताया है कि अबतक मिले साक्ष्य व जांच में आए तथ्यों के आधार पर मंत्री आलमगीर आलम मनी लाउंड्रिंग के दोषी हैं।
ED ने उन्हें 15 मई को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। ED ने बताया है कि अबतक की जांच में यह बात सामने आयी है कि आलमगीर आलम से जुड़े कई प्रभावशाील लोग ग्रामीण विकास विभाग के ठेकों के आवंटन व कमीशनखोरी में प्रभावशाली भूमिका में थे।
पहली बार 16 मई को लिए गए थे रिमांड भी
16 मई को पहली बार 6 दिन की रिमांड पर लिया गया। इसके बाद 22 मई को उनकी पेशी ईडी की विशेष अदालत में हुई।
22 मई को ईडी को दुबारा आलमगीर आलम का पांच दिनों का रिमांड मिला।
तीसरी बार 27 मई को तीन दिन की रिमांड कोर्ट ने दी। पूछताछ के बाद गुरुवार को उन्हें जेल भेज दिया गया।
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