
बौद्ध पूर्णमासी 16 मई :आज ही हुआ था भगवान बुद्ध का जन्म

पंचांग के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा का पर्व हर साल वैशाख पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. ऐतिहासिक स्रोतों से पता चलता है कि वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था तथा इसी तिथि को उन्हें कठिन साधना के बाद बुद्धत्व की प्राप्ति भी हुई थी. इस लिए यह तिथि बौद्ध धर्म के अलावा हिंदू धर्म में भी बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाती है. लोक मान्यता है भगवान बुद्ध, भगवान श्री विष्णु के अंतिम और 9वें अवतार थे.

पंचांग के अनुसार वैशाख पूर्णिमा 15 मई को दोपहर 12 बजकर 45 मिनट से शुरू हो रही है जो अगले दिन 16 मई को 9 बजकर 45 मिनट तक रहेगी. चूँकि 16 तारीख को पूर्णिमा की उदया तिथि है. इसलिए बुद्ध पूर्णिमा 16 मई को मनाई जाएगी.

*बुद्ध पूर्णिमा का महत्व*
बौद्ध धर्म के लोग इस तिथि को भगवान बुद्ध के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं. जगह-जगह प्रकाशोत्सव किया जाता है. भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को आत्मसात करके उनके प्रति सच्ची श्रद्धा रखी जाती है. कहा जाता है कि अगर भगवान बुद्ध की शिक्षाओं पर ध्यान दिया जाए, तो मनुष्य के सांसारिक कष्ट कम हो जाते हैं. उनका मन शुद्ध हो जाता है.
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