
पटना : बिहार में लगभग 500 किलाोमीटर एनएच (राष्ट्रीय राजमार्ग) का निर्माण अधर में लटक गया है। वन विभाग की आपत्ति और जमीन अधिग्रहण की समस्या के कारण इन सड़कों का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। स्थिति यह है कि इन सड़कों का टेंडर अरसा पहले हो चुका है। एजेंसी का भी चयन हो चुका है। बावजूद वन विभाग के रवैये के कारण चयनित एजेंसियां लगभग 11 हजार करोड़ की सड़क परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं कर पा रही है। अगर समय रहते काम शुरू हो जाता तो अब तक कई सड़कों का काम पूरा हो जाता।
एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के अधीन नौ सड़कों का निर्माण अधर में लटका हुआ है। 304.75 किमी लंबी इन सड़कों के निर्माण पर 7485 करोड़ 48 लाख खर्च होने हैं। लंबित सड़क परियोजनाओं में उमागांव-सहरसा, बकरपुर हाट-मानिकपुर, सीवान-मशरख, बख्तियारपुर-रजौली, वाराणसी-रांची-कोलकाता, औरंगाबाद से बिहार-झारखंड की सीमा तक चोरदाहा छह लेन, छपरा बाइपास के अलावा बागमती और लखनदेई नदी पर बनने वाला पुल शामिल है। वहीं, पथ निर्माण विभाग के अधीन एनएच प्रभाग के अधीन 11 सड़कों का काम शुरू नहीं हो सका है।

*इन सड़कों की लंबाई 200 किलोमीटर है।*

इसके निर्माण में लगभग चार हजार करोड़ खर्च होने हैं। लंबित परियोजनाओं में मेहरौना-सीवान रामजानकी मार्ग का चार लेन में उन्नयन, शेखपुरा, जमुई, खैरा में बाईपास, बक्सर-चौसा में बाइपास, दाउदनगर, नासरीगंज, दावथ, कटोरिया, लखपुरा, बांका व पंजवारा में बाइपास, सरवन-चकाई का दो लेन चौड़ीकरण, दरभंगा दिल्ली मोड़ से बनवारी पट्टी तक चार लेन, रामनगर से रोसड़ा तक दो लेन, कटिहार बाइपास और अमनाबाद-मनिहारी दो लेन सड़क चौड़ीकरण शामिल है।
*राष्ट्रीय औसत से कम एनएच हैं बिहार में*
देश के अन्य राज्यों की तुलना में बिहार में एनएच कम है। ऐसे में अगर वन विभाग का यही रवैया रहा तो बिहार को राष्ट्रीय औसत को छूने में अभी वर्षों लग जाएंगे। तय लक्ष्य के अनुसार निर्माण नहीं होने से एनएच की लंबाई अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ पा रही है। बिहार में अभी एनएच की कुल लंबाई 6129 किलोमीटर है। देश के कुल एनएच में बिहार की भागीदारी मात्र 4.04 फीसदी है। साल-दर-साल देश के एनएच में बिहार की भागीदारी घटती जा रही है। वर्ष 2005 में देश के कुल एनएच में बिहार की भागीदारी 5.4 फीसदी थी।
*नए एक्सप्रेसवे पर भी संकट मंडरा रहा*
केंद्रीय आम बजट में तीन एक्सप्रेसवे की घोषणा की गई है। बक्सर-भागलपुर, पटना-पूर्णिया और आमस-दरभंगा से बोधगया, गया, राजगीर और वैशाली को जोड़ने के लिए स्पर बनाया जाना है। केंद्र सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए 26 हजार करोड़ की स्वीकृति दी है। लेकिन जिस तरह पहले की सड़क परियोजनाएं जमीन के अभाव में या वन विभाग के रवैये के कारण अधर में लटक जा रही है, वही हाल इन तीनों एक्सप्रेसवे का भी हो तो इसमें कोई अचरज वाली बात नहीं होगी। इन सभी परियोजनाओं के लिए भी जमीन की आवश्यकता है।
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