
पंकज ठाकुर
बड़कागांव। बड़कागांव प्रखंड के जंगलों में महुआ चुनने के लिए ग्रामीण आग लगा रहे हैं। छोटे-छोटे पौधे, झाड़ियां, जंगली औषधियां जलकर नष्ट हो जा रहे हैं। बार-बार जंगल में आग लगने के कारण जंगल का घनत्व कम होते जा रहा है। जंगल में वर्तमान समय में भी कुछ औषधियां उपलब्ध है जिनका प्रयोग लोग करते हैं। जैसे हडजओर, गऐठई, टोना , जंगली कोहड़ा, गुलर आदि। लोग कहते हैं कि हड़जोड़ को शरीर के हड्डी के स्थान पर सिर्फ बांध देने से हड्डी जुट जाती है।
जंगल में आग लगने के कारण जंगली जीव-जंतु पक्षी को भी भारी नुकसान हो रहा है जिसके कारण इनकी संख्या में कमी होता जा कमी जा रही है। इस दिशा में। समिति के सदस्य लोग 5 वर्षों से लगातार सक्रियता के साथ कार्य कर रहे है। कुलेश्वर कुमार का कहना है कि महूदी पहाड़ हजारों एकड़ में फैला हुआ है जैसे महुदी, मिर्जापुर, प्लांडु, खपिया, कांडतरी, पंडरिया, सीकरी, निरी इत्यादि का जंगल जो एक दूसरे जंगलों से जुड़ा हुआ है। जब एक पहाड़ पर आग लगता है तो धीरे-धीरे पूरा पहाड़ में आग फैल जाता है जिसके कारण हम लोगों को आग बुझाने में ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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