
रिपोर्ट सत्येन्द्र यादव
महराजकुल्टी,संतों का अवतरण, आग लगी आकाश में, झड़ झड़ गिरे अंगार, अगर न होते संत जना, जल ही मरता संसार उक्त बाते बुधवार को बराकर नदी तट पर आयोजित संत सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के 140 वीं जयंति के अवसर पर स्वामी परेशानंद जी महाराज ने कहीं।

बराकर नदी तट के संतमत सत्संग आश्रम में एक दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान में सत्संग करते हुए स्वामी परेशानंद महराज ने श्रद्धालुओ को संबोधित करते हुए कहां कि दुनिया के जितने भी देश हैं। मानव के संस्कार, आहार व्यवहार और धर्म शिक्षा के आधार पर एक अच्छे इंसान की पहचान कराती हैं। यह शिक्षा मां और सद्गुरु ही दे सकते हैं। यह चार संस्कार जीस देश में हैं वह मूल्यवान हो जाता हैं। उन्होंने कहां 20 वी शदी के महान संत महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज ने सनातन धर्म की जो पोध लगाइ हैं वह आज वट-वृक्ष बन गया हैं। आज झारखंड, बिहार, यूपी तथा बंगाल के विभिन्न जिलों से आये लोग इस के गवाह हैं।

धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत प्रार्थना से प्रारंभ हुई तथा प्रवचन और आरती के बाद भंडारा का आयोजन किया गया। जहां आयोजन कमेटी के गोपीराम भालोटिया, प्रमोद भालोटिया, शंकर रजनीवाल, संदीप लोयलका, जयप्रकाश केसरी, वीरेंद्र प्रसाद वर्णवाल, सीताराम बर्णवाल, अर्जुन वर्णवाल, समेत बड़ी संख्या में महिलाए भी उपस्थित थी।
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