
: Dec 11, 2022
भगवान सूर्यदेव का प्रिय और उपास्य मास पौष आज से प्रारंभ हो रहा है। पौष मास में भगवान सूर्यदेव की पूजा-उपासना से अनेक रोगों का नाश होता है और सूर्य की पीड़ा दूर होती है। इसलिए इस मास में आने वाले प्रत्येक रविवार को व्रत रखा जाता हैं। जिसे पौष रविवार व्रत कहा जाता है। इस पौष मास में चार रविवार आएंगे।

*जानते हैं क्यों करते हैं पौष रविवार व्रत*

पौष रविवार व्रत मुख्यत: सूर्य को प्रसन्न करने के लिए किए जाते हैं। यदि जन्मकुंडली में सूर्य पीड़ाकारी हो और सूर्य की महादशा चल रही हो। सूर्य खराब होने पर मान-सम्मान, पर-प्रतिष्ठा पर आंच आती है। शारीरिक रोगों में सूर्य खराब होने पर मानसिक कष्ट, व्यर्थ की चिंताएं, नेत्र रोग, मस्तिष्क रोग आते हैं। इन सबके निवारण के लिए और सूर्य की शांति के लिए पौष रविवार व्रत किए जाते हैं। जिन परिवारों में संतान सुख नहीं है, उन्हें भी पौष रविवार के व्रत संकल्प लेकर अवश्य करना चाहिए। सुख-समृद्धि, धन-धान्यादि व्रत करने वाले के घर में सहज ही प्राप्त हो जाते हैं।
*कैसे करते हैं पौष रविवार व्रत*
पौष मास के पहले रविवार को सूर्योदय पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत होकर ठीक सूर्योदय के समय तांबे के कलश में लाल पुष्प डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। पूजा स्थान में बैठकर काम्य संकल्प लेकर पौष रविवार व्रत करने का संकल्प लें। इसके बाद सूर्यदेव की मूर्ति या चित्र का पंचोपचार पूजन कर गुड़ के हलवे का नैवेद्य लगाएं। व्रत की कथा सुनें। इस दिन व्रत रखा जाता है और नमक का सेवन नहीं किया जाता है। साथ ही सूर्यास्त के पूर्व ही भोजन किया जाता है, सूर्यास्त होने के बाद नहीं। इस बार पौष में चार रविवार आएंगे। ये 11, 18, 25 दिसंबर और 1 जनवरी को आएंगे। चारों व्रत पूर्ण हो जाने पर अंतिम पौष रविवार के दिन व्रत का उद्यापन किया जाता है। इसमें किसी ब्राह्मण-पुरोहित को बुलाकर विधि विधान से व्रत का उद्यापन करवाएं।
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