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पिकनिक स्पॉट: 44 साल पुराने माटीगढ़ा डैम का नही हुआ आज भी सौंदर्यीकरण,वादा कर भी भूल गए विधायक ढुल्लू महतो

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ByAdmin Office

Dec 22, 2022

 

*बाघमारा :* बाघमारा के लोगों के लिए अमूल्य धरोहर कहे जाने वाले बीसीसीएल के माटीगढ़ा डैम के सौंदर्यीकरण की कोई सुगबुगाहट नहीं है. बीजेपी विधायक ढुल्लू महतो ने इसके सौंदर्यीकरण व इसे पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा की थी.
इस डैम का प्राकृतिक सौंदर्य बरबस अपनी ओर लोगों को खींच लाता है. परिवारों के साथ पिकनिक मनाने का यह बेहतरीन स्पाॅट है.डैम के बगल में गोवर्धन पर्वत, जमुनिया काली मंदिर एवं इकोलॉजिकल रेस्टोरेंशन पार्क भी है.

*क्या अपना वादा कर भूल गए विधायक ?*

पर्यटन स्थल बनने की असीम संभावनाएं होते हुए भी माटीगढ़ा डैम का आज तक विकास नहीं हो सका. भाजपा विधायक ढुलू महतो ने पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा की थी, लेकिन वे अपना वादा अब तक पूरा नहीं कर सके हैं. विधायक श्री महतो ने डैम का सौंदर्यीकरण कराने के साथ-साथ डैम को पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा की थी. लोगों को अभी भी उम्मीद है कि विधायक अपने वादे पर खरा उतरेंगे.

*नया पुल निर्माण कार्य शुरू*

बीजेपी विधायक श्री महतो की अनुशंसा पर दो जिले को जोड़ने के लिए डैम के नीचे ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल धनबाद के द्वारा मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत जमुनिया नदी पर नया पुल निर्माण कार्य तो शुरू हो गया, लेकिन डैम के सौंदर्यीकरण की कोई सुगबुगाहट नहीं है. डैम का निर्माण हुए 44 साल हो गये, लेकिन आज तक डैम के सौंदर्यीकरण का प्रयास बीसीसीएल प्रबंधन ने नहीं किया. अगर पर्यटन स्थल बन जाता तो क्षेत्र का विकास के साथ-साथ डैम की सुंदरता कुछ और होती.

*उजड़ गया पार्क,सूख गए फूल पत्ते*

डैम का निर्माण 44 वर्ष पूर्व बीसीसीएल के बरोरा क्षेत्र संख्या एक के द्वारा किया गया था. इसका उद्घाटन बिहार के पूर्व कोयला राज्य मंत्री अब्दुल गनी खां चौधरी ने किया था. वर्ष 1980 के बाद डैम की देखरेख ब्लॉक दो क्षेत्र प्रबंधन कर रहा है. निर्माण के समय डैम के बगल में सुंदर पार्क भी बनाया गया था. जिसमें दो जोड़े हिरण थे. बच्चों के खेलने-कूदने के लिए झूला आदि सामान लगाया गया था, लेकिन रखरखाव के अभाव में पार्क उजड़ गया.

*डैम की ये है खासियत*

डैम के पास एचडी 185 लाख गैलेन क्षमता वाला टैंक बना है. यहां से बीसीसीएल के एरिया वन एवं ब्लॉक टू की कॉलोनियों में जलापूर्ति होती है. टैंक पर चढ़ कर प्राकृतिक सुंदरता को देखा जा सकता है. बड़े चट्टानों व बालू के टीले के बीच बैठना तथा घूमना-फिरना पर्यटकों को भाता है. 50 फीट की ऊंचाई पर बने डैम से गिरते पानी का दृश्य आगंतुकों का मन मोह लेता है. सूर्योदय और पहाड़ी की ओट में डूबते सूरज की स्वर्णिम किरणों से प्रतिबिंबित जल का अलग ही आकर्षण होता है.

*बड़ा दिन 25 दिसंबर से शुरू होता है सैलानियों का आना-जाना*

डैम के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए 25 दिसंबर से ही सैलानियों का आना-जाना शुरू हो जाता है. पौष मास में यहां लोगों की भीड़ लगी रहती है.


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