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निरसा में नौकरी ठगी के शिकार हुए धीरज साव बाद एक और मजबूर पिता आया सामने|

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ByAdmin Office

Oct 8, 2022

 

निरसा : बेटे को रेलवे में नौकरी दिलाने के अरमान में मैंने अपने पुरखों का जमीन बेच दिया अब ना ही बेटे को नौकरी मिला ना ही जमीन बचा मेरे सामने आत्महत्या के सिवा अब कोई रास्ता नहीं बचा|

जी हां ऐसा कहना है एक मजबूर पिता बंगाल पुरुलिया के झाड़ू खामा निवासी शमसुद्दीन का जिन्होंने अपने जीवन भर के कमाई के साथ साथ पुरखों का जमीन भी बेच दिया और ठगी का शिकार हो गया|

शमसुद्दीन की माने तो वह 5 महीना पहले निरसा थाने में सपन के खिलाफ शिकायत कर चुके हैं| पर सपन नाग के रसूल एवं पॉलिटिकल दबाव के कारण पुलिस ने शमसुद्दीन को मामला दर्ज करने से टालता रहा|

रेलवे में फर्जी नियोजन को लेकर मुखिया पति का अपहरण एवं मारपीट का मामला निरसा से निकलकर पूरे झारखंड में तूल पकड़ा हुआ है जिसको लेकर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी ट्वीट किया है|

वही यह खबर प्रकाश में आने के बाद बंगाल पुरुलिया झाड़ू खामा निवासी समसुद्दीन ने निरसा थाने में सपन के खिलाफ मई माह में ही नौकरी के नाम पर 2,20,000 / – दो लाख बीस हजार ऐंठने का शिकायत दर्ज कर चुका है। पर ना जाने क्यों इतने गंभीर मामले को निरसा पुलिस संज्ञान में लेने की आवश्यकता नहीं समझा|

शमसुद्दीन ने बताया मैं मोटर साईकिल का टायर मरम्मत कर परिवार का भरण – पोषण करते हैं । मेरे लड़के को रेलवे में नियोजन दिलाने के प्रलोभन पर मुझसे गोपालपुरा कालोनी पो ० मुगमा थाना निरसा ,धनबद के रहनेवाले सपन नाग , उम्र 33 , पिता महावीर नाग ने मुझसे 2 लाख 20 हजार रुपए ठग लिया है|

शमसुद्दीन के अनुसार ठग ने रेलवे आद्रा डिविजन से लेकर रेलवे उच्च कार्यालय कोलकाता तक ले गया| शमसुद्दीन ने बताया यह एक गिरोह है जिस में और भी कई बेरोजगार बच्चों को ठगा गया होगा| इन लोगों की पहुंच रेलवे की हर कार्यालय में है| जिस कारण कोई भी इन लोगों के झांसे में आसानी से आ जाते हैं|

शमसुद्दीन ने इस मामले में मीडिया के समक्ष कई अहम दस्तावेज भी पेश किए| जिसमें करीब 60 हजार रुपये चिरकुंडा एक्सिस बैंक में सुमन नाग के खाते में जमा किए हैं। कई सर्टिफिकेट और लाइसेंस उनके पास में है|

समसुद्दीन ने इस ठग का कई नाम बताएं कहीं तापस नाग, कहीं बीरबल नाग तो कहीं रुपेश नाग के नाम से भी जाना जाता है। इनका पहुंच का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है यह वोटर कार्ड और आधार कार्ड पर नाम कभी भी और कहीं भी बदल लिया करता था|

भुगतभोगी का कहना है कि वह बहुत गरीब आदमी है। तगादा के लिये मुगमा सायकिल से आता जाता था। सपन के घर पहुंचने पर मारपीट करने की धमकी दिया करता था| उसने सपन नाग के ड्राइविंग लाइसेंस की कापी के साथ एक्सिस बैंक के द्वारा भेजी गई रकम का पर्ची व बातचीत का ऑडियो क्लिप भी दिया।

विभिन्न विभिन्न तारीख को में पैसे देने की सूची भी दीया जिसमें दिनांक 22/10/15 को 3100 / दिनांक 24/10 / 15 को 5,000 / 25/10/15 को 10,000 / 26/10/15 को 10,000 / – दिनाक 27/10/15 को रकम 10,000 / फिर. 31/10/15 को 20,000 / फिर दिनांक 19/11/15 को 7000
वो दिनांक 26/11/15 को 40,000 / दिनांक 4 /12/15 को 15,000 / 5/12/15 को 15,000 / दिनांक 8/12/15 की 15,000 / – वो दिनांक 10/12/15 को 15,000 तथा दिनाई 17/12/15 को 10,000 / –
शमसुद्दीन ने बताया हमने कुल राशि 2,20,000 / -दो लाख बीस हजार रूपया दिया है। करीब 60 हजार बैंक ट्रांसफर है|

शमसुद्दीन का कहना है इस प्रकार के बेरोजगार युवाओं को झांसे में लेकर ठगी गिरोह का मामला अगर प्रशासन द्वारा पर्दाफाश नहीं होता है तो आने वाले दिनों में और भी कई बेरोजगार युवा इनके झांसे में आएंगे|

वही शमसुद्दीन ने यह बताया अगर मेरे पैसे की वापसी नहीं होती है तो मेरे सामने आत्महत्या के सिवा कोई भी रास्ता नहीं बचा है|अब देखना है यह खबर तूल पकड़ने के बाद ठगी के शिकार हुए और कितने लोग सामने आते हैं|


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