

धनबाद— निरसा।श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम दिवस की शुरुआत विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई जिसके बाद देवकीनन्दन ठाकुर जी महाराज ने कथा पंडाल में बैठे सभी भक्तों को ” राधा नाम की लग गयी डोर ” भजन श्रवण कराया।
मनुष्य को शास्त्रो में बताये गए बातों का अपने जीवन में पालन करना चाहिए। अपने मन की मर्ज़ी से पशु जीवन यापन करते है। जो भी मनुष्य शास्त्रों के बताये गए मार्ग पर चलता है वही मानव कहलानें के योग्य होता है। मनुष्य को हमेशा गाय की सेवा करनी चाहिए और कभी भी गोमांस का सेवन नहीं करना चाहिए। भगवान श्री कृष्ण ने भी गोमाता की सेवा की थी। मनुष्य को जीवन में कभी भी अंहकार नहीं करना चाहिए क्योंकि अंहकारी मनुष्य से भगवान कभी खुश नहीं होते है और उसका सबकुछ छीन लेते है। भगवान कभी भी बुरे कार्य करने वाले मनुष्य पर प्रसन्न नहीं होते है। मनुष्य को अपने हर काम को ईमानदारी से करना चाहिए। हर सनातनी को कथा, पूजा- पाठ, जागरण में भारतीय वस्त्र का प्रयोग करना चाहिए। मनुष्य को पुण्य की प्राप्ति के लिए अपने धर्म के नियमों का पालन करना चाहिए। मनुष्य को अधिक शक्ति और अधिक पैसे की प्राप्ति होने पर भी सहनशील होना चाहिए। मनुष्य को जीवन में संकट आने पर घबराना नहीं चाहिए और भगवान की शरण में चले जाना चाहिए। मनुष्य अपने जीवन में काफी गलती करता है लेकिन गलती होने पर मनुष्य को उन गलतियों से सीख कर अपने जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।
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