
नईदिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अशांत मणिपुर में महिलाओं के खिलाफ हिंसा से निपटने के लिए एक व्यापक प्रणाली बनाने की वकालत करते हुए सोमवार को सवाल किया कि राज्य में मई महीने से इस तरह की घटनाओं के मामले में कितनी प्राथमिकी दर्ज की गयी हैं?
केंद्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि यदि शीर्ष अदालत मणिपुर हिंसा के मामले में जांच की निगरानी करती है तो केंद्र को कोई आपत्ति नहीं है.

मणिपुर हिंसा से संबंधित याचिकाओं पर प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ सुनवाई कर रही है. जब मामला सुनवाई के लिए आया तो वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उन दो महिलाओं की ओर से पक्ष रखा जिन्हें चार मई के एक वीडियो में कुछ लोगों द्वारा निर्वस्त्र करके उनकी परेड कराते हुए देखा गया था.

सिब्बल ने कहा कि उन्होंने मामले में एक याचिका दायर की है. मामले में सुनवाई चल रही है.
सीजेआई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच आज याचिका पर सुनवाई कर रही है, जहां मणिपुर वायरल वीडियो मामले की दोनों पीड़िताएं भी सुप्रीम कोर्ट में मौजूद हैं. दोनों महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले में दखल की मांग की है. 4 मई को हुई यौन उत्पीड़न मामले से जुड़ी एफआईआर को लेकर याचिका दाखिल की गई है. आपको बता दें कि दोनों पीड़ित महिलाओं ने सरकार और केंद्र के खिलाफ याचिका दाखिल की है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट से अपनी पहचान की सुरक्षा की मांग की है.
मणिपुर में 4 मई को भीड़ द्वारा दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने के मामले की जांच सीबीआई कर रही है. इस घटना का वीडियो 19 जुलाई को वायरल हुआ था. इस घटना से देशभर में गुस्सा है. 27 जुलाई को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया था, जिसमें केंद्र की ओर से कहा गया था कि महिलाओं के साथ कथित यौन उत्पीड़न मामले को सीबीआई को सौंपा गया है.
मणिपुर में 3 मई को शुरू हुई हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. दो महीने बाद भी हालात जस के तस हैं. सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट में आज मामले की सुनवाई होनी है. हालांकि, केस की सुनवाई केंद्र सरकार ने मणिपुर से बाहर करने की मांग की है. इसके केस में ट्रायल भी फास्ट ट्रैक में चलाने की मांग की गई है, जिससे 6 महीने के अंदर चार्जशीट दाखिल हो सके.
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से दावा किया गया है कि मणिपुर में शांति बहाली की दिशा लगातार बातचीत की जा रही है.
केंद्र सरकार की ओर से दोनों समुदायों के पदाधिकारियों से बीचतीत की जा रही है, जो अंतिम दौर में है. उधर, मणिपुर हिंसा पर पश्चिम बंगाल विधानसभा में आज टीएमसी निंदा प्रस्ताव पेश करेगी. बता दें मणिपुर पुलिस ने थौबल जिले के नोंगपोक सेकमाई थाने में 18 मई को अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ सामूहिक बलात्कार, अपहरण और हत्या का केस दर्ज किया था. सीबीआई ने अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी के संबंध में कार्रवाई शुरू कर दी है.
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