• Sat. Apr 25th, 2026

धनबाद में प्रशासन का बड़ा ‘हथौड़ा’: झरिया की दुकान से 4 मासूम मुक्त, संचालक पर शिकंजा!

admin's avatar

Byadmin

Apr 25, 2026
crescent ad

 

 

रिपोर्ट: सन्नी शर्मा

 

धनबाद: कोयलांचल को बाल श्रम के अभिशाप से मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन अब ‘एक्शन मोड’ में आ गया है। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन के कड़े रुख के बाद जिले में बाल तस्करों और मासूमों से काम कराने वाले संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है। ताजा मामला झरिया का है, जहाँ एक दुकान पर छापेमारी कर चार बच्चों को नारकीय जीवन से आजाद कराया गया।

 

‘चंदन काइट्स’ पर धावा: मासूमियत का सौदा पड़ा महंगा

 

झरिया थाना क्षेत्र के फल पट्टी स्थित “चंदन काइट्स” नामक प्रतिष्ठान में लंबे समय से छोटे बच्चों से काम कराए जाने की सूचना मिल रही थी। श्रम अधीक्षक पंकज कुमार के नेतृत्व में गठित ‘जिला धावा दल’ ने जब दुकान की घेराबंदी की, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। टीम ने मौके से 4 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित निकाला।जांच में पता चला कि इन बच्चों को चंद रुपयों की मामूली मजदूरी देकर घंटों काम कराया जा रहा था। ये सभी बच्चे झरिया के ही स्थानीय निवासी हैं।

 

जनता दरबार की शिकायत बनी कार्रवाई की नींव

 

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इस प्रतिष्ठान का इतिहास दागदार रहा है। हाल ही में जनता दरबार में एक मामला पहुँचा था, जिसमें एक 13 वर्षीय बालक को बहला-फुसलाकर काम पर रखने और काम के दौरान उसके साथ हुई दुर्घटना का जिक्र था। इस घटना ने प्रशासन की संवेदनशीलता को झकझोर दिया, जिसके बाद डीसी आदित्य रंजन ने तुरंत सख्त कार्रवाई का आदेश जारी किया। श्रम अधीक्षक पंकज कुमार ने जिले के सभी दुकानदारों, होटल मालिकों और गैराज संचालकों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों का भविष्य दांव पर लगाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

 

जून महीने में चलेगा ‘महा-अभियान’

 

प्रशासन ने एलान किया है कि बाल श्रम को जड़ से मिटाने के लिए पूरे जून माह में विशेष जागरूकता और छापेमारी अभियान चलाया जाएगा। इस मुहिम में श्रम विभाग के साथ-साथ झारखंड ग्रामीण विकास ट्रस्ट और बाल संरक्षण इकाई के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे, ताकि रेस्क्यू किए गए बच्चों का पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके।

 

प्रशासन की जनता से अपील –

 

पंकज कुमार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे समाज के सजग प्रहरी बनें। अगर आपको कहीं भी किसी बच्चे को मजदूरी करते हुए देखें, तो इसकी सूचना तुरंत श्रम विभाग या स्थानीय पुलिस को दें। आपकी एक छोटी सी पहल किसी बच्चे को ‘काम’ की बेड़ियों से मुक्त कर ‘कलम’ थमा सकती है।

 

कानूनी कार्रवाई का खाका:

 

आर्थिक दंड: ₹20,000 से ₹50,000 तक का जुर्माना

 

कारावास : 6 महीने से 2 साल तक की जेल

 

कार्रवाई : जुर्माना और सजा दोनों एक साथ संभव


There is no ads to display, Please add some
Post Disclaimer

स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *