
*धनबाद :* गुलाबी आंखें जो तेरी देखी…. ये गाना तो आपने जरूर सुना होगा? पर क्या आंखों का गुलाबी होना सही है? जवाब है- नहीं। गुलाबी आंखों का अंग्रेजी अनुवाद होता है, पिंक आइज और पिंक आइज असल में एक मेडिकल कंडिशन है। इसे कंजंक्टिवाइटिस के नाम से भी जाना जाता है। कंजंक्टिवाइटिस को पिंक आइज इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस समस्या में आंख का सफेद रंग वाला हिस्सा गुलाबी या लाल हो जाता है। आमतौर पर गर्मी के दिनों में यह दिक्कत अधिक होती है जिसमें आंखों में दर्द के साथ चिपचिपाहट और खुजली होती रह सकती है।

पिंक आइज, पलकों और आईबॉल को कवर करने वाली पारदर्शी झिल्ली में होने वाली सूजन की समस्या को कहा जाता है। इस झिल्ली को कंजंक्टिवा कहते हैं। जब कंजंक्टिवा में छोटी रक्त वाहिकाएं सूज जाती हैं तो आंखों का सफेद भाग लाल या गुलाबी दिखाई देने लगता है, कंजंक्टिवा में होने वाली इस तरह की दिक्कत को कंजंक्टिवाइटिस कहा जाता है।

धूप व बरसात के कारण कोयलांचल में बैक्टीरिया व वायरस एक साथ आंखों पर हमला कर रहे हैं। इस कारण बच्चों से लेकर बड़े वायरल कंजेक्टिवाइटिस (आंख आना) के शिकार हो रहे हैं। सामान्य भाषा में इसे पिंक आई भी कहा जाता है।संक्रमण के कारण मरीज की आंखों में तेज गड़न, सूजन व दर्द होने के साथ ही पानी निकल रहा है।
*हवा से बैक्टीरिया दूसरे की आंखों में चले जाते हैं*
एसएनएमएमसीएच के नेत्र रोग विभाग के ओपीडी में हर दिन 15-20 ऐसे मरीज आ रहे हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. लोकेश जालान ने बताया कि बच्चों संग कामकाजी लोग भी इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं। यह काफी संक्रामक होता है, केवल हवा से ही इसके बैक्टेरिया व वायरस दूसरे की आंखों में चले जाते हैं। कुछ ही समय में आंखों में खुजली होने के बाद आंखें लाल होने लगती है। कई स्कूल प्रबंधन भी अभिभावकों को मैसेज भेज पीड़ित बच्चों को स्कूल नहीं भेजने की अपील कर रहे हैं।
*बीते पांच दिनों में मिले इतने मरीज*
19 जुलाई- 12 मरीज
20 जुलाई- 25 मरीज
21 जुलाई- 27 मरीज
22 जुलाई- 17 मरीज
24 जुलाई- 31 मरीज
*इन बातों का रखें ख्याल*
संक्रमित मरीज के संपर्क में नहीं आएं। घर का कोई सदस्य संक्रमित हो जाए, तो उसे साफ तौलिया एवं कपड़े दें। संक्रमित का तौलिए या कपड़े का प्रयोग नहीं करें। अपने हाथों से आंखों को सीधा नहीं मलें। एक ही कमरे में ज्यादा लोग नहीं करें। संक्रमित होने पर चश्मा जरूर पहनें। खुद से कोई भी दवा या ड्राप नहीं डालें।
मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। आंखों में बारिश का पानी जाते ही यह आंखों को संक्रमित कर रहा है। इस संक्रमण को बैक्टीरियल व वायरल कंजेक्टिवाइटिस कहते हैं। बच्चों को इससे अधिक पीड़ा हो रही है। कई जगह इसे पिंक आई भी कहा जाता है।
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