
*बैंकमोड़ ,धनबाद का फ्लाईओवर लगभग पचास सालों से छाती ताने लेकिन मस्तक झुकाए खड़ा है. 70 के दशक में बने इस अतिविशेष पुल की हड्डियां अब बिल्कुल कमजोर पड़ गयीं है. हर आने जाने वालों से इसकी एक ही प्रार्थना रहती है कि अब तो माफ कर दो,मैं बूढ़़ा हो गया हूँ. सरकार और धनबाद की मेरी अगर बहुत जरूरत है तो कम से कम मेरी हालत को तो ठीक करा दिया जाए,ताकि कोई कलंक मेरे माथे पर नहीं लगे*
धनबाद: लीजिए धनबाद की “लाइफ लाइन” बैंक मोड़ फ्लाईओवर की मरम्मत में फिर पेंच फंस गया है. फ्लाईओवर मरम्मत के लिए 15 करोड़ का टेंडर गुरुवार को खुला लेकिन केवल एक ही ठेकेदार के टेंडर डालने के कारण इसे नियमत रद्द कर दिया गया. इसके बाद पथ निर्माण विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुरुवार को ही री टेंडर का प्रस्ताव मुख्यालय को भेज दिया है. अब मुख्यालय से अनुमतिआने के बाद ही इस पर आगे री टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. यह फ्लाईओवर मरम्मत मांग रहा है ,हालत उसकी जर्जर हो गई है. पिछले साल ही इसकी लोड टेस्टिंग हुई थी. उसके बाद रिपेयर के लिए संचिका आगे बढ़ी थी. लेकिन फिर पेंच फस गया है.

निर्माण के हो गए 50 साल लेकिन कभी नहीं हुई रिपेयर

बैंकमोड़ ,धनबाद का फ्लाईओवर लगभग पचास सालों से छाती ताने लेकिन मस्तक झुकाए खड़ा है. 70 के दशक में बने इस अतिविशेष पुल की हड्डियां अब बिल्कुल कमजोर पड़ गयीं है. हर आने जाने वालों से इसकी एक ही प्रार्थना रहती है कि अब तो माफ कर दो,मैं बूढ़़ा हो गया हूँ. सरकार और धनबाद की मेरी अगर बहुत जरूरत है तो कम से कम मेरी हालत को तो ठीक करा दिया जाए,ताकि कोई कलंक मेरे माथे पर नहीं लगे. कोई तो तारणहार बनकर सामने आये. यह रिपोर्ट के अनुसार हरेक दस मिनट में इस पुल होकर दो हजार गाड़ियां गुजरती है. अंदाज लगाया जा सकता है कि इस पुल पर कितना भारी दबाव है.
जानिए घटित लोमहर्षक घटना का इतिहास
अगर पुल के इतिहास में जांए तो एक लोमहर्षक घटना इसमें छिपी हुई है. सत्तर के दशक में पुल बनने के पहले रेल लाइन के कारण धनबाद शहर दो हिस्सों में बंटा हुआ था. अभी की तरह पहले भी गया पुल के बाद नया बाजार का इलाका शुरू होता था. कतरास जाने वाली रेल लाइन पर फाटक बना हुआ था. रेलगाड़ियों के आने के समय फाटक बंद कर दिया जाता था. फाटक बंद होने पर वाहनों की कतार लग जाती थी. पुल बनाने की मांग हो रही थी लेकिन कोई सुनता नहीं था. इसी बीच एक बहुत बढ़ी दुर्घटना हो गई. एक रेल इंजन शटिंग के दौरान अलग होकर बगैर चालक के कतरास वाली लाइन पर चल पड़ा. फाटक पर तैनात कर्मी को जानकारी नहीं मिल पाई. इसी बीच क्राशिंग पर यात्रियों से भरी बस पहुंच जाती है. इंजन ने बस को धक्का दे मारा,इस दुर्घटना में दो दर्जन से अधिक लोग मारे गए. फिर क्या था,कोहराम मच गया. राज्य सरकार(तत्कालीन बिहार) की चूलें हिलने लगी,आननफानन में पुल का काम शुरू हुआ और कई अड़चनों के बाद तैयार हो पाया.
धनबाद की आबादी के साथ ही बढ़ता गया लोड
लेकिन उसके बाद धनबाद जिले की आबादी बढ़ती गई, वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा होता गया, धनबाद महत्वपूर्ण शहर बन गया, डीजीएमएस, आईएसएम तो पहले से थे लेकिन उसके बाद बीसीसीएल का मुख्यालय धनबाद में खुल गया. बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बन गया. धनबाद से रांची जाने के लिए यह ओवरब्रिज “लाइफ लाइन” कहा जाने लगा. मैथन जलापूर्ति की पाइप लाइन इस ओवर ब्रिज होकर गुजारी. लेकिन इतने अंतराल के बाद भी कभी इसकी मरम्मत पर न सरकार का ध्यान गया और ना कभी जनप्रतिनिधियों ने इसके लिए आवाज बुलंद की. नतीजा हुआ कि ओवरब्रिज जर्जर होता चला गया और आज बिल्कुल जर्जर हो गया है. पिछले साल ओडिसा की कंपनी ने पुल की लोड टेस्टिंग की थी. उसने पुल की मरम्मत का सुझाव दिया था. कहा था कि अगर सही ढंग से मरम्मत करा दी जाए तो इसका जीवन 20 साल बढ़ सकता है. लेकिन मरम्मत का कार्य अभी भी शुरू नहीं हुआ है. टेंडर जो निकला था वह तकनीकी कारणों से रद्द हो गया है. देखना है मरम्मत के काम में तेजी आती है अथवा झारखंड सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कराती रहेगी.
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